क्या राजस्थान में टलने जा रहे हैं पंचायत चुनाव? 31 जुलाई की डेडलाइन पर भाजपा नेता के बड़े बयान से मचा भारी सियासी बवाल
राजस्थान के सियासी गलियारों में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य का राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ा दिया है। प्रदेश में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या भजनलाल सरकार आगामी पंचायत चुनावों को टालने की पूरी तैयारी कर चुकी है? इस सुगबुगाहट को उस वक्त हवा मिली जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता ने आगामी 31 जुलाई की डेडलाइन को लेकर एक बड़ा और विवादित बयान दे दिया। इस बयान के सार्वजनिक होते ही कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गांव की सरकार और स्थानीय लोकतंत्र से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर छिड़े इस नए विवाद ने राजस्थान की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है।
भाजपा नेता के 31 जुलाई वाले बयान से आखिर क्यों भड़का विपक्ष? दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा के एक कद्दावर नेता ने एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान संकेत दिया कि 31 जुलाई तक पंचायतों के पुनर्गठन, वार्डबंदी और प्रशासनिक तैयारियों को पूरा करना बेहद मुश्किल है। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में चुनाव टालने की जमीन तैयार करने के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा स्थानीय स्तर पर अपनी कमजोर स्थिति को भांप चुकी है, इसीलिए प्रशासनिक कमियों का बहाना बनाकर चुनावों को आगे खिसकाना चाहती है। इस एक बयान ने पंचायती राज विभाग के अधिकारियों से लेकर गांवों में चुनावी बिसात बिछा रहे नेताओं तक सबको हैरान कर दिया है।
पंचायतों के पुनर्गठन और कानूनी पेचीदगियों में फंसा पूरा मामला राजस्थान में पंचायत चुनाव समय पर कराने के रास्ते में कई बड़ी व्यावहारिक और कानूनी चुनौतियां खड़ी हैं। नए जिलों के गठन और कई ग्राम पंचायतों की सीमाओं में बदलाव के बाद नए सिरे से वार्डबंदी (Delimitation) का काम अभी भी अधर में लटका हुआ है। इसके अलावा, मतदाता सूचियों का अपमार्जन और डेटा वेरिफिकेशन करने की 31 जुलाई की तय डेडलाइन बेहद नजदीक है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम समय में जमीनी स्तर पर पूरी प्रक्रिया को त्रुटिहीन तरीके से संपन्न कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, और यही वजह है कि चुनाव टलने की थ्योरी को बल मिल रहा है।
कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला, कोर्ट जाने की दी बड़ी चेतावनी चुनाव टलने की खबरों और भाजपा नेता के बयान पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। कांग्रेस ने साफ शब्दों में कहा है कि लोकतंत्र में समय पर चुनाव कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ब्यूरोक्रेसी का इस्तेमाल कर इस प्रक्रिया को धीमा कर रही है ताकि प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ाया जा सके। कांग्रेस नेतृत्व ने एलान किया है कि यदि 31 जुलाई की समयसीमा के बाद भी चुनाव की तारीखों का एलान नहीं किया गया, तो वे इस असंवैधानिक कदम के खिलाफ सीधे राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियों और सरकार के रुख पर टिकी नजरें इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि वे अपनी तरफ से तैयारियों को पूरा करने में जुटे हैं, लेकिन अंतिम फैसला सरकार द्वारा सौंपे जाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और बजटीय मंजूरी पर निर्भर करता है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस बढ़ते सियासी विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाते हैं और क्या राजस्थान में गांव की सरकार चुनने के लिए मतदाता समय पर पोलिंग बूथों तक पहुंच पाएंगे या उन्हें लंबा इंतजार करना होगा।