राजस्थान में पहली बार भरेगा महिला विधायकों का महाकुंभ
राजस्थान के संसदीय इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। राज्य में पहली बार देश भर की महिला विधायकों और सांसदों का एक ऐतिहासिक 'महाकुंभ' (राष्ट्रीय महिला विधायक सम्मेलन) आयोजित किया जा रहा है। इस अभूतपूर्व आयोजन को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी खुद नई दिल्ली पहुंचे और उन्होंने देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार मुलाकात की। देवनानी ने राष्ट्रपति मुर्मु को इस राज्य स्तरीय सह राष्ट्रीय महिला सम्मेलन का मुख्य अतिथि बनने और इसका औपचारिक उद्घाटन करने के लिए भावभीना निमंत्रण पत्र सौंपा। महिला सशक्तिकरण, विधायी प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के दौर में आयोजित होने वाला यह महाकुंभ न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करेगा। इस खबर के सामने आते ही देश भर के राजनीतिक गलियारों में इस अनोखे सम्मेलन को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति को न्योता: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सौंपी विशेष आमंत्रित प्रति
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के दौरान उन्हें सम्मेलन के उद्देश्यों और इसकी रूपरेखा से विस्तार से अवगत कराया। देवनानी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वयं भारत की मातृशक्ति, अदम्य साहस और लोकतांत्रिक मूल्यों की सर्वोच्च प्रतीक हैं। ऐसे में उनके करकमलों द्वारा इस महिला विधायक महाकुंभ का उद्घाटन होना पूरे राजस्थान और देश भर की महिला प्रतिनिधियों के लिए अत्यंत गौरव और प्रेरणा का विषय होगा। राष्ट्रपति मुर्मु ने राजस्थान विधानसभा की इस अनूठी और दूरदर्शी पहल की जमकर सराहना की और सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान देवनानी ने राष्ट्रपति को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, हस्तशिल्प और मोमेंटो भी भेंट किया, जिससे दोनों के बीच सकारात्मक और सार्थक चर्चा हुई।
देश भर की महिला सांसदों और विधायकों का होगा समागम: नीति निर्माण में बढ़ेगी नारी शक्ति की धमक
राजस्थान में आयोजित होने जा रहे इस पहले महिला विधायक महाकुंभ में देश के सभी राज्यों की विधानसभाओं, विधान परिषदों और संसद (लोकसभा व राज्यसभा) की महिला प्रतिनिधियों को एक साथ एक मंच पर आमंत्रित किया जा रहा है। इस महाकुंभ का मुख्य उद्देश्य विधायी कामकाज में महिला जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को और अधिक प्रभावी बनाना, कानून निर्माण में उनके दृष्टिकोण को प्राथमिकता देना तथा उनके सामने आने वाली व्यावहारिक और राजनीतिक चुनौतियों पर गहन मंथन करना है। सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी और वैचारिक सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जहाँ वरिष्ठ महिला नेत्रियाँ अपने अनुभवों को साझा करेंगी और नई महिला विधायकों को विधायी नियमों की बारीकियां सिखाएंगी। संसद में पारित 33 फीसदी महिला आरक्षण कानून के परिप्रेक्ष्य में यह आयोजन भविष्य की महिला राजनीति की दशा और दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित होगा।
गुलाबी नगरी जयपुर बनेगी ऐतिहासिक सम्मेलन की साक्षी: विधानसभा में तैयारियों का दौर शुरू
इस राष्ट्रीय महिला विधायक सम्मेलन का आयोजन राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित अत्याधुनिक राजस्थान विधानसभा परिसर में करने की योजना बनाई गई है। जयपुर में देश भर से आने वाली वीआईपी महिला जनप्रतिनिधियों के स्वागत, ठहरने, सुरक्षा और परिवहन के लिए अभी से उच्च स्तरीय तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय मिलकर एक विशेष समन्वय समिति का गठन कर रहे हैं ताकि आयोजन में किसी भी तरह की कमी न रहे। गुलाबी नगरी को इस ऐतिहासिक अवसर पर विशेष रूप से सजाया जाएगा, जिससे राजस्थान की पारंपरिक 'अतिथि देवो भव:' की संस्कृति की झलक पूरी दुनिया को देखने को मिले। विभिन्न राज्यों की महिला प्रतिनिधि यहाँ न केवल विधायी मुद्दों पर चर्चा करेंगी, बल्कि राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरों, कला और संस्कृति का भी अवलोकन करेंगी।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में राजस्थान की अनूठी पहल: वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में नया रिकॉर्ड
राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में वासुदेव देवनानी लगातार नवाचारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही को पेपरलेस करने से लेकर जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस को बढ़ावा देने के कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब देश भर की महिला विधायकों का महाकुंभ आयोजित कराकर राजस्थान विधानसभा एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करने जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के राष्ट्रीय आयोजनों से राज्यों के बीच विधायी अनुभवों का आदान-प्रदान होता है और महिला नेताओं में नया आत्मविश्वास पैदा होता है। राजस्थान की यह दूरगामी पहल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बनेगी और देश के शासन-प्रशासन में नारी शक्ति के प्रभाव को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।