Rajasthan Water Crisis : सूख रहा है मरुधरा का कंठ पाताल में जा रहा है पानी, रिपोर्ट में हुआ डरावना खुलासा
News India Live, Digital Desk : राजस्थान अपनी सांस्कृतिक विरासत और किलों के लिए जाना जाता है, लेकिन आज यह एक ऐसे दुश्मन से जूझ रहा है जो अदृश्य है भूजल संकट (Groundwater Crisis)। लाइव हिंदुस्तान की खास सीरीज 'मरुधर' की ताजा रिपोर्ट ने राजस्थान के भविष्य को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। राज्य के अधिकांश जिलों में भूजल स्तर (Water Table) इतनी तेजी से नीचे गिर रहा है कि आने वाले कुछ सालों में कई इलाके पूरी तरह 'डार्क ज़ोन' में तब्दील हो सकते हैं।
पाताल की ओर भागता पानी: डराने वाले आंकड़े
रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के 33 में से 25 से ज्यादा जिलों में स्थिति बेहद नाजुक है।
गिरता जलस्तर: कई इलाकों में भूजल हर साल 2 से 5 मीटर तक नीचे जा रहा है।
खतरनाक रसायनों की मार: जैसे-जैसे पानी गहरा हो रहा है, उसमें फ्लोराइड और आर्सेनिक की मात्रा बढ़ रही है, जो इंसानी सेहत के लिए जहर के समान है।
सूखते कुएं और ट्यूबवेल: पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर ही नहीं, अब जयपुर और जोधपुर जैसे विकसित शहर भी पानी की बूंद-बूंद को तरसने लगे हैं।
क्यों गहरा रहा है यह संकट?
इस जल संकट के पीछे प्रकृति से ज्यादा मानवीय हस्तक्षेप जिम्मेदार है:
अंधाधुंध दोहन: खेती और उद्योगों के लिए जमीन से पानी निकालने की दर, रीचार्ज होने की दर से कई गुना ज्यादा है।
वर्षा जल संचयन की कमी: मानसून की बारिश का ज्यादातर हिस्सा बहकर बेकार चला जाता है, हम उसे सहेजने में विफल रहे हैं।
शहरीकरण: कंक्रीट के जंगलों के कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं जा पा रहा है।
मरुधर सीरीज का खुलासा: क्या है समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अब भी नहीं संभले तो राजस्थान का बड़ा हिस्सा रहने लायक नहीं बचेगा। रिपोर्ट में कुछ जरूरी सुझाव दिए गए हैं:
परंपरागत जल संरक्षण: पुराने कुओं, बावडियों और जोहड़ों को पुनर्जीवित करना अनिवार्य है।
ड्रिप इरिगेशन: किसानों को कम पानी वाली फसलों और टपक सिंचाई की ओर मुड़ना होगा।
सरकारी सख्ती: भूजल के अवैध दोहन पर कड़े कानून और उनकी पालना समय की मांग है।