Rajasthan Strange News : 55 की उम्र, 38 साल की शादी और 17वीं संतान, इस महिला की कहानी आपको हैरान कर देगी
News India Live, Digital Desk: आज के ज़माने में जब हम 'हम दो, हमारे दो' की बात करते हैं, तब अगर कोई यह कहे कि एक महिला ने 55 साल की उम्र में अपने 17वें बच्चे को जन्म दिया है, तो शायद यक़ीन करना मुश्किल होगा। लेकिन यह सच है। यह हैरान कर देने वाली कहानी राजस्थान के बूंदी ज़िले की है, जहाँ एक महिला की मातृत्व की यात्रा डॉक्टरों और आम लोगों, सबके लिए एक पहेली बन गई है।
यह कहानी है लहमू बाई की
बूंदी ज़िले के रामनगर गाँव में रहने वाली 55 वर्षीय लहमू बाई और उनके पति अर्जुन की ज़िंदगी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है। उनकी शादी को 38 साल हो चुके हैं, और इन 38 सालों में लहमू बाई 17 बार माँ बनी हैं। हाल ही में उन्होंने अपने 17वें बच्चे को जन्म दिया है, जो कि एक स्वस्थ बेटा है।
बेटे की चाह में जारी रहा सफ़र
आप सोच रहे होंगे कि आख़िर इतने बच्चे क्यों? इस सवाल के पीछे एक लंबा इंतज़ार और 'बेटे की चाह' की एक पारंपरिक कहानी छिपी है। लहमू बाई और अर्जुन के घर एक के बाद एक 8 बेटियों ने जन्म लिया। परिवार बढ़ता गया, लेकिन बेटे की कमी उन्हें हमेशा खलती रही। इस बीच उनके कई बच्चे जन्म के कुछ समय बाद जीवित नहीं रह सके, जो उनके दर्द को और बढ़ा देता था।
इन 17 बच्चों में से सिर्फ़ 9 ही ज़िंदगी की कसौटियों पर खरे उतर सके और आज जीवित हैं। हाल ही में जन्मे बेटे से पहले, उनके परिवार में 8 बेटियाँ और सिर्फ़ 1 बेटा था। अब दूसरे बेटे के जन्म के बाद परिवार की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। उनका कहना है कि अब जाकर उनका 'परिवार पूरा हुआ है'।
डॉक्टर भी हैं हैरान
यह ख़बर सिर्फ़ सामाजिक रूप से ही नहीं, बल्कि मेडिकल साइंस के लिहाज़ से भी चौंकाने वाली है। 55 साल की उम्र में, जब महिलाएँ मेनोपॉज़ के दौर से गुज़रती हैं और माँ बनने की क्षमता लगभग खत्म हो जाती है, उस उम्र में लहमू बाई का एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। डॉक्टर भी इस बात से हैरान हैं कि इतनी ज़्यादा उम्र में बिना किसी आधुनिक मेडिकल सहायता के उन्होंने एक सामान्य और स्वस्थ बच्चे को कैसे जन्म दिया।
यह कहानी जहाँ एक तरफ़ 'बेटे की चाह' जैसी सामाजिक सोच पर सवाल उठाती वहीं दूसरी तरफ़ एक माँ के जज़्बे और प्रकृति के करिश्मे की एक अनोखी मिसाल भी पेश करती