Rajasthan Politics : क्या कांग्रेस का बागी' बिगाड़ेगा भाया का खेल? अंता उपचुनाव का पूरा समीकरण समझें

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News India Live, Digital Desk: राजस्थान में भले ही अभी विधानसभा के आम चुनाव दूर हों, लेकिन बारां जिले की अंता सीट पर हो रहे उपचुनाव ने पूरे प्रदेश का सियासी पारा चढ़ा दिया है. यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट को भरने की लड़ाई नहीं, बल्कि यह कांग्रेस और बीजेपी, दोनों के लिए अपनी-अपनी ताकत और रणनीति को परखने का एक बड़ा मौका बन गया है.

मंगलवार को जैसे ही नामांकन का आखिरी दिन खत्म हुआ, अंता की चुनावी तस्वीर भी काफी हद तक साफ हो गई. दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने पत्ते खोल दिए हैं और अब यहां का मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है.

BJP का 'युवा जोश': छात्र नेता को दिया मौका

बीजेपी ने इस बार एक चौंकाने वाला, लेकिन सोची-समझी रणनीति के तहत एक युवा चेहरे पर दांव खेला है. पार्टी ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से निकले छात्र नेता मोरपाल सुमन को अपना उम्मीदवार बनाया है. मोरपाल सुमन इलाके में एक युवा और सक्रिय चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं. बीजेपी को उम्मीद है कि उनकी युवा अपील और छात्र राजनीति का अनुभव उन्हें जीत दिला सकता है.

यह फैसला यह भी दिखाता है कि बीजेपी अब युवा चेहरों को आगे बढ़ाकर भविष्य की राजनीति के लिए एक नई ज़मीन तैयार कर रही है.

कांग्रेस में 'अनुभव' का दम, पर अंदरूनी लड़ाई का डर?

दूसरी तरफ, कांग्रेस खेमे में तस्वीर थोड़ी उलझी हुई नज़र आ रही है. पूर्व मंत्री और इलाके के कद्दावर नेता माने जाने वाले प्रमोद जैन भाया ने तो नामांकन दाखिल कर दिया है. उनके साथ-साथ, कांग्रेस के ही एक और बड़े नेता, नरेश मीणा, ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भर दिया है.

हालांकि, कांग्रेस के अंदरखाने से जो खबर आ रही है, वह यह है कि पार्टी आलाकमान ने प्रमोद जैन भाया के नाम पर ही मुहर लगाई है. लेकिन नरेश मीणा का निर्दलीय खड़ा होना, कांग्रेस के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन सकता है. नरेश मीणा की अपने समुदाय और युवाओं में अच्छी पकड़ है. अगर वह मैदान में डटे रहते हैं, तो वह कांग्रेस के ही वोटों में सेंध लगा सकते हैं, जिसका सीधा फायदा बीजेपी उम्मीदवार को मिल सकता है.

अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह कैसे नरेश मीणा को मनाकर उनका नामांकन वापस करवाती है. अगर कांग्रेस अपनी अंदरूनी लड़ाई को सुलझा नहीं पाई, तो यह 'त्रिकोणीय' मुकाबला उसके लिए महंगा साबित हो सकता है.

यह उपचुनाव सिर्फ अंता का विधायक नहीं चुनेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा.