Rajasthan Politics : संगीता आर्या ने दिया इस्तीफा क्या अब सुधरेगा राजस्थान का सबसे बदनाम आयोग?

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News India Live, Digital Desk : राजस्थान के बेरोजगार युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए आज एक बहुत बड़ी और अहम खबर आई है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC), जो पिछले काफी समय से अपनी भर्तियों से ज्यादा 'विवादों' और 'पेपर लीक' के लिए चर्चा में रहा है, वहां आज एक बड़ा फेरबदल हुआ है।

आयोग की मेंबर (सदस्य) संगीता आर्या (Sangeeta Arya) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

कौन हैं संगीता आर्या?
अगर आप राजस्थान की राजनीति पर नजर रखते हैं, तो आपको पता होगा कि संगीता आर्या पूर्व मुख्य सचिव (Former Chief Secretary) निरंजन आर्या की पत्नी हैं। उनकी नियुक्ति पिछली कांग्रेस (गहलोत) सरकार के दौरान हुई थी। उनकी नियुक्ति को लेकर भी उस वक्त काफी सवाल उठे थे, और अब जब राज्य में सत्ता बदल चुकी है, तो उन पर पद छोड़ने का नैतिक और राजनीतिक दबाव भी बताया जा रहा था।

इस्तीफा क्यों हुआ?
भले ही इसे 'निजी कारण' बताया जा रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि RPSC की साख पिछले कुछ सालों में रसातल में चली गई थी। बाबूलाल कटारा जैसे सदस्यों की गिरफ्तारी और पेपर लीक की घटनाओं ने आयोग की विश्वसनीयता खत्म कर दी थी।
नई बीजेपी सरकार (भजनलाल शर्मा सरकार) आने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि आयोग की "सफाई" होगी। सरकार चाहती थी कि पिछली सरकार द्वारा नियुक्त सदस्य खुद हट जाएं ताकि नए सिरे से ईमानदार लोगों को लाया जा सके। शायद संगीता आर्या का इस्तीफा इसी कड़ी का एक हिस्सा है।

छात्रों के लिए क्या मायने हैं?
राजस्थान के लाखों छात्र, जो दिन-रात एक करके पढ़ाई करते हैं, उनके लिए यह एक उम्मीद की किरण हो सकती है। छात्र लम्बे समय से मांग कर रहे थे कि RPSC को भंग किया जाए या इसके सदस्यों को बदला जाए, ताकि परीक्षाओं में धांधली रुके।

  • एक सदस्य के हटने से पूरा सिस्टम तो नहीं बदलेगा, लेकिन यह शुरुआत जरूर मानी जा रही है।
  • उम्मीद है कि अब जो नए सदस्य आएंगे, वे पारदर्शिता (Transparency) से काम करेंगे और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होगा।

क्या आगे और इस्तीफे होंगे?
संगीता आर्या के इस्तीफे के बाद अब बाकी बचे सदस्यों पर भी दबाव बढ़ना तय है। क्या आने वाले दिनों में और भी विकट गिरेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, संगीता आर्या ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को भेज दिया है।

छात्र बस यही दुआ कर रहे हैं कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन उन्हें "साफ-सुथरी परीक्षा" और "समय पर रिजल्ट" चाहिए।