Rajasthan Police : महिलाओं के खिलाफ अपराध में 9.24% की कमी – क्या राजस्थान अब बन रहा है और ज़्यादा सुरक्षित?
News India Live, Digital Desk: राजस्थान में पिछले दो सालों के दौरान अपराध के आंकड़ों में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली है, और यह दावा खुद राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG क्राइम) दिनेश एमएन ने किया है. उन्होंने जोर देकर कहा है कि यह कमी केवल कागज़ी आंकड़ों का कमाल नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था में आए वास्तविक और ज़मीनी सुधार को दर्शाती है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब अक्सर राज्यों में अपराधों के ग्राफ पर राजनीतिक बहस होती रहती है.
अपराधों में कितनी गिरावट आई है? एक नज़र..
आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में पिछले दो साल में कुल अपराधों में 19.45% की बड़ी कमी दर्ज की गई है. इस दौरान, महिला अत्याचार के मामलों में 9.24% की उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है जहाँ 2023 में महिलाओं के खिलाफ कुल 45,450 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 36,563 पर आ गई है.
इसी तरह, अनुसूचित जाति (SC) के खिलाफ अपराधों में भी कमी आई है, जहाँ 2023 में 8,449 मामले दर्ज हुए थे, जो अब 7,008 रह गए हैंअनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ मामले भी 2,453 से घटकर 2,282 पर आ गए हैं.आर्थिक अपराधों में भी मामूली लेकिन महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है, जहाँ 2023 में 27,675 मामले सामने आए थे, जो 2024 में घटकर 27,637 रह गए. भारतीय दंड संहिता (IPC) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) से जुड़े अपराधों में भी 9.20% की कमी देखी गई है.
ADG क्राइम का क्या कहना है?
ADG क्राइम दिनेश एमएन (Dinesh MN) ने इस सकारात्मक बदलाव पर रोशनी डालते हुए कहा कि राजस्थान पुलिस ने अपराध नियंत्रण के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष पंजीकरण प्रणाली (फ्री-रजिस्ट्रेशन) अपनाई है.उन्होंने बताया कि शिकायतों का तेज़ी से निपटारा करने, अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए शिकायतें दर्ज कराने की सुविधा देकर इस बदलाव को मुमकिन किया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधों में यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि वास्तविक नियंत्रण और राज्य पुलिस की प्रतिबद्धता का परिणाम है.
विशेषज्ञों की राय और आगे की चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सकारात्मक बदलाव के पीछे पुलिस की सक्रियता के साथ-साथ नागरिकों की बढ़ती जागरूकता और शिकायत दर्ज कराने में आसानी भी एक अहम भूमिका निभा रही है.डिजिटल प्लेटफॉर्म और 'फ्री-रजिस्ट्रेशन' नीति के चलते अब शिकायतें तेज़ी से दर्ज होती हैं, जो अपराधियों के लिए खतरे की घंटी है. हालांकि, ADG क्राइम ने यह चेतावनी भी दी है कि यह गिरावट तभी स्थायी रह सकती है, जब पुलिस और समाज मिलकर अपराध नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास करते रहें. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की रणनीति लगातार अपडेट होती रहेगी, ताकि अपराधियों को कोई मौका न मिले.
यह एक साफ संदेश है कि अगर प्रशासन, पुलिस और जनता मिलकर काम करें तो अपराध नियंत्रण में एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है और महिलाओं व कमजोर वर्गों के खिलाफ होने वाले अपराधों में कमी से समाज में एक सकारात्मक संदेश जा रहा है.