Rajasthan Nikay Election 2026 : राजस्थान में छोटी सरकार की जंग15 अप्रैल तक चुनाव कराने का हाई कोर्ट का आदेश, वार्डों में दावेदारों की कतार
News India Live, Digital Desk : राजस्थान में पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों को लेकर चुनावी बिसात बिछ चुकी है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस अब वार्ड स्तर पर अपनी पैठ मजबूत करने में जुट गए हैं। हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन अब किसी भी देरी के मूड में नहीं है।
1. हाई कोर्ट की डेडलाइन: 15 अप्रैल तक चुनाव अनिवार्य
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है:
अंतिम तिथि: पंचायत और नगर निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में संपन्न कराने होंगे।
परिसीमन (Delimitation): वार्डों के परिसीमन और पुनर्गठन का कार्य 31 दिसंबर 2025 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे अब अंतिम रूप दिया जा रहा है।
2. संभावित चुनावी टाइमलाइन (Expected Schedule)
सियासी गलियारों और निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, चुनावों का कार्यक्रम कुछ इस तरह रह सकता है:
| चुनाव का प्रकार | संभावित अधिसूचना (Notification) | संभावित मतदान (Voting) |
|---|---|---|
| पंचायती राज चुनाव | मार्च 2026 का प्रथम सप्ताह | मार्च के मध्य से अंत तक |
| नगरीय निकाय चुनाव | मार्च 2026 का दूसरा/तीसरा सप्ताह | अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक |
नोट: आयोग द्वारा 25 फरवरी 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी। 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयुपूरी करने वाले युवा इस बार पहली बार मतदान कर सकेंगे।
3. 'हाइब्रिड मॉडल' और खर्च की नई सीमा
इस बार के चुनाव कई मायनों में अलग और आधुनिक होंगे:
बैलेट पेपर और EVM: राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि पंच और सरपंच के चुनाव पारंपरिक तरीके से यानी बैलेट पेपर से होंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्यों के लिए EVM का इस्तेमाल किया जाएगा।
खर्च सीमा: आयोग ने चुनाव खर्च की सीमा बढ़ा दी है। नगर पालिका पार्षद के लिए खर्च सीमा अब ₹1.50 लाख और सरपंच के लिए ₹1 लाख कर दी गई है।
4. राजनीतिक दलों की 'वार्ड टू सत्ता' रणनीति
चुनावों की आहट ने नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ा दी है:
भाजपा का प्लान: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने संभाग स्तर पर बैठकें शुरू कर दी हैं। भाजपा ने 'कार्यशाला' के माध्यम से वार्ड स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने और सरकारी योजनाओं को घर-घर पहुंचाने का लक्ष्य दिया है।
कांग्रेस की तैयारी: विपक्षी दल कांग्रेस भी वार्डों में अपने पुराने गढ़ बचाने और नए इलाकों में पैठ बनाने के लिए 'पदयात्रा' और 'बूथ प्रबंधन' पर जोर दे रही है।
विशेष: क्यों अहम हैं ये चुनाव?
निकाय और पंचायत चुनाव को 'सत्ता का सेमीफाइनल' माना जाता है। वार्ड स्तर की ये जीत तय करती है कि ग्रामीण और शहरी मतदाताओं का रुझान किस ओर है। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने भी परिसीमन मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर सरकार को बड़ी राहत दी है, जिससे अब चुनाव समय पर होने का रास्ता पूरी तरह साफ है।