Rajasthan Education News : सिर्फ पढ़ाना ही काम नहीं, जानिए शिक्षकों की किन दो आदतों पर भड़के मंत्री दिलावर

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News India Live, Digital Desk: Rajasthan Education News :  शिक्षक, जिन्हें हम भविष्य का निर्माता कहते हैं। लेकिन क्या हो जब ये निर्माता ही कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियाँ करने लगें, जिनका बच्चों पर गहरा असर पड़ता है? राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इसी मुद्दे पर शिक्षकों को बड़ी सख्ती से एक आईना दिखाया है। उनकी बातें कड़वी लग सकती हैं, लेकिन हैं सोलह आने सच।

पहली नसीहत: राष्ट्रगान का सम्मान करें

एक कार्यक्रम में बोलते हुए मंत्री जी का दर्द साफ़ झलका। उन्होंने कहा कि यह देखकर बहुत पीड़ा होती है कि जब स्कूलों में राष्ट्रगान होता है, तो कुछ शिक्षक सावधान खड़े होने की बजाय इधर-उधर टहलते रहते हैं या आपस में बातें करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "यह देश का अपमान है। अगर आप शिक्षक होकर सिर्फ 52 सेकंड भी देश के सम्मान में खड़े नहीं हो सकते, तो आप बच्चों को देशभक्ति का क्या पाठ पढ़ाएंगे?"

उनकी यह बात हर उस भारतीय को सोचने पर मजबूर करती है जो राष्ट्रगान को सिर्फ एक औपचारिकता समझता है।

दूसरी और सबसे बड़ी चिंता: क्लास में बजता मोबाइल फोन

इसके बाद मंत्री जी ने उस समस्या पर बात की, जो आज लगभग हर स्कूल में देखने को मिल रही है - क्लासरूम में शिक्षकों द्वारा मोबाइल का इस्तेमाल। उन्होंने इसे बच्चों के लिए 'तनाव' बताया।

ज़रा सोचिए, एक शिक्षक पूरी तन्मयता से पाठ पढ़ा रहा है और बीच में उसका फ़ोन घनघना उठता है। या वह पढ़ाते-पढ़ाते व्हाट्सएप चेक करने लगता है। इससे न सिर्फ़ क्लास का अनुशासन भंग होता है, बल्कि बच्चों का ध्यान भी पूरी तरह से टूट जाता है। जो एकाग्रता बन रही होती है, वह एक झटके में खत्म हो जाती है।

मंत्री जी का कहना था कि जब शिक्षक का ध्यान ख़ुद अपने फ़ोन में होगा, तो वह बच्चों पर सौ प्रतिशत ध्यान कैसे दे पाएगा? यह सीधे-सीधे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

संदेश साफ़ है - पहले आप आदर्श बनें

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की इन बातों का सार सिर्फ़ इतना है कि शिक्षक सिर्फ़ एक नौकरी नहीं करते, बल्कि एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी निभाते हैं। उनका हर व्यवहार बच्चों के लिए एक उदाहरण बनता है। अगर वे ख़ुद अनुशासित नहीं रहेंगे, तो छात्रों से इसकी उम्मीद कैसे कर सकते हैं? यह सख्ती बच्चों के बेहतर भविष्य और स्कूलों में पढ़ाई का एक अच्छा माहौल बनाने के लिए ज़रूरी है।