Rajasthan : जयपुर की 87 कॉलोनियों में कोहराम,10 हजार परिवारों पर बेघर होने का संकट, सड़कों पर उतरा जनसैलाब

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News India Live, Digital Desk: राजधानी जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में स्थित 87 कॉलोनियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े रुख और हाउसिंग बोर्ड को दी गई तीन हफ्ते की मोहलत के बाद इन कॉलोनियों में रहने वाले हजारों लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। शनिवार को "नियमन हेतु संघर्ष समिति" के आह्वान पर श्योपुर चौराहे से पिंजरापोल गौशाला तक विशाल विरोध मार्च निकाला गया।

विवाद की जड़: क्या है पूरा मामला?

यह कानूनी लड़ाई पिछले कई दशकों से चल रही है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने इसे और जटिल बना दिया है:

हाउसिंग बोर्ड का दावा: यह जमीन राजस्थान हाउसिंग बोर्ड द्वारा अवाप्त (Acquire) की गई थी, जिस पर बाद में अवैध कब्जा कर कॉलोनियां बसा दी गईं।

सुप्रीम कोर्ट से झटका: अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका (SLP) को खारिज कर दिया था, जिसमें इन कॉलोनियों को राहत देने की बात कही गई थी। कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन के पास बुलडोजर चलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

हाईकोर्ट की सख्ती: फरवरी 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने हाउसिंग बोर्ड को फटकार लगाते हुए तीन हफ्ते के भीतर जमीन खाली कराने के आदेश दिए हैं।

संघर्ष समिति और स्थानीय निवासियों का पक्ष

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रघुनंदन सिंह हाड़ा और परशुराम चौधरी ने प्रशासन के सामने अपनी दलीलें रखी हैं:

पुराना इतिहास: निवासियों का कहना है कि ये बस्तियां 40-50 साल पुरानी हैं। लोगों ने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर सहकारी समितियों से प्लॉट खरीदे थे।

सुविधाएं और टैक्स: इन घरों में बिजली-पानी के कनेक्शन हैं और लोग सालों से हाउस टैक्स भर रहे हैं, तो अब इन्हें अवैध कैसे कहा जा सकता है?

नियमितीकरण की मांग: संघर्ष समिति की मांग है कि तकनीकी खामियों को दूर कर इन कॉलोनियों का नियमितीकरण (Regularization) किया जाए, न कि बुलडोजर चलाकर 10 हजार परिवारों को सड़क पर लाया जाए।

वर्तमान स्थिति: क्या होगा आगे?

पक्षरुख
प्रशासन/JDAकोर्ट के आदेश की पालना करने के लिए बाध्य है, लेकिन भारी विरोध के कारण कार्रवाई रुकी हुई है।
राज्य सरकारमानवीय आधार पर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है, लेकिन कानूनी बाधाएं आड़े आ रही हैं।
जनताआंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है; "जब तक नियमन नहीं, तब तक चैन नहीं" का नारा।