Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा में भारी हंगामा ,दौसा विधायक के साथ बदसलूकी पर कांग्रेस का कड़ा रुख

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News India Live, Digital Desk: राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही आज शोर-शराबे और तीखी नोकझोंक के बीच शुरू हुई। सदन में मुख्य मुद्दा दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा (कांग्रेस) के साथ अधिकारियों द्वारा किए गए कथित दुर्व्यवहार का रहा। कांग्रेस ने इसे केवल एक विधायक का अपमान नहीं, बल्कि पूरे सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य बताया है। विपक्ष ने इस मामले में 'विशेषाधिकार हनन' (Privilege Motion) का नोटिस देते हुए दोषी अधिकारियों पर तुरंत गाज गिराने की मांग की है।

क्या है पूरा विवाद? आखिर क्यों भड़की कांग्रेस?

मिली जानकारी के अनुसार, दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा किसी जनसमस्या को लेकर एक सरकारी कार्यालय गए थे, जहाँ उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। कांग्रेस का आरोप है कि:

लोकतंत्र का अपमान: निर्वाचित जनप्रतिनिधि की बात सुनने के बजाय अधिकारियों ने उनके साथ तानाशाही रवैया अपनाया।

प्रोटोकॉल का उल्लंघन: सरकारी नियमों के मुताबिक, अधिकारियों को विधायकों के साथ शिष्टाचार से पेश आना चाहिए, जिसका इस मामले में उल्लंघन हुआ।

सदन में गूंज: कांग्रेस विधायक दल के नेताओं ने प्रश्नकाल को रोककर इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की, जिससे सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई।

क्या होता है 'विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव'? (Privilege Motion)

संसदीय लोकतंत्र में विधायकों और सांसदों को कुछ विशेष अधिकार (Privileges) प्राप्त होते हैं ताकि वे बिना किसी दबाव के अपना काम कर सकें।

कब लाया जाता है: जब किसी अधिकारी या व्यक्ति द्वारा किसी सदस्य के कार्य में बाधा डाली जाती है या उनका अपमान किया जाता है।

सजा का प्रावधान: यदि विशेषाधिकार समिति जांच में दोषी पाती है, तो संबंधित अधिकारी को सदन के समक्ष बुलाकर फटकार लगाई जा सकती है या निलंबन जैसी कड़ी सजा दी जा सकती है।

सरकार का बचाव: 'जांच के बाद होगी कार्रवाई'

हंगामे को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार जनप्रतिनिधियों के सम्मान के प्रति गंभीर है। सरकार की ओर से कहा गया कि मामले की तथ्यों के आधार पर जांच कराई जाएगी और यदि कोई दोषी पाया गया, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और 'वेल' में आकर नारेबाजी शुरू कर दी।

बजट सत्र पर हंगामे का साया

राजस्थान में इस समय बजट सत्र चल रहा है, जहाँ जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिल और योजनाओं पर चर्चा होनी है। लेकिन विपक्ष के इस कड़े रुख ने संकेत दे दिए हैं कि जब तक इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होती, सदन सुचारू रूप से चलना मुश्किल है।

प्रमुख मांगें: >

 आरोपी अधिकारी का तत्काल निलंबन। 

सदन में सरकार की ओर से आधिकारिक माफी

 भविष्य में विधायकों के प्रोटोकॉल को लेकर सख्त गाइडलाइन।