पटना मेट्रो के लिए रेलवे ने दिखाई हरी झंडी, मोइनुल हक स्टेडियम और राजेंद्र नगर के बीच शुरू होगी टनल की खुदाई
News India Live, Digital Desk: बिहार की राजधानी में मेट्रो के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिली है। रेलवे ने पटना मेट्रो के कॉरिडोर-2 (पटना जंक्शन से न्यू ISBT) के तहत मोइनुल हक स्टेडियम से राजेंद्र नगर टर्मिनल के बीच टनल बनाने की अनुमति दे दी है। रेलवे ट्रैक और टर्मिनल के नीचे से गुजरने वाली इस टनल के लिए NOC मिलने के बाद, अब टनल बोरिंग मशीन (TBM) एक बार फिर रफ्तार पकड़ने के लिए तैयार है।
क्यों रुकी थी खुदाई? (The NOC Challenge)
राजेंद्र नगर टर्मिनल के नीचे से टनल का एलाइनमेंट गुजरना था। रेलवे की अपनी विकास योजनाओं और ट्रैक की सुरक्षा को देखते हुए तकनीकी जांच की जा रही थी। रेलवे इस बात की पुष्टि करना चाहता था कि मेट्रो टनल से भविष्य में टर्मिनल के विस्तार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। गहन मंथन के बाद अब रेलवे ने अपनी मंजूरी दे दी है।
टनल निर्माण की खास बातें (Technical Highlights)
कुल दूरी: मोइनुल हक स्टेडियम से राजेंद्र नगर टर्मिनल होते हुए मलाही पकड़ी के बीच लगभग 1800 मीटर की टनल तैयार होनी है।
रेलवे के नीचे टनल: इसमें से करीब 800 मीटर का हिस्सा सीधे राजेंद्र नगर टर्मिनल और पटना-हावड़ा मेन रेल लाइन के नीचे से गुजरेगा।
सबसे गहरा स्टेशन: राजेंद्र नगर मेट्रो स्टेशन पटना मेट्रो नेटवर्क का सबसे गहरा स्टेशन होने की संभावना है, जो जमीन से लगभग 21 मीटर नीचे होगा।
दोबारा शुरू होगा काम: रिपोर्ट के अनुसार, 12 मार्च 2026 से इस हिस्से में खुदाई का काम फिर से शुरू हो सकता है।
कॉरिडोर-2 का रूट और लक्ष्य
यह अंडरग्राउंड सेक्शन पटना के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को जोड़ेगा। इस कॉरिडोर में छह प्रमुख अंडरग्राउंड स्टेशन शामिल हैं:
राजेंद्र नगर
मोइनुल हक स्टेडियम
पटना विश्वविद्यालय
पीएमसीएच (PMCH)
गांधी मैदान
आकाशवाणी
लक्ष्य: पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (PMRC) का लक्ष्य है कि कॉरिडोर-2 के 6 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड हिस्से (मोइनुल हक स्टेडियम से पटना जंक्शन) का काम अप्रैल 2026 तक पूरा कर लिया जाए, ताकि उसके बाद ट्रैक बिछाने और इलेक्ट्रिकल काम शुरू हो सके।
पटना वासियों को क्या होगा फायदा?
राजेंद्र नगर और मोइनुल हक स्टेडियम जैसे प्रमुख केंद्रों के मेट्रो से जुड़ने के बाद, अशोक राजपथ और कंकड़बाग ओल्ड बाईपास पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा। छात्र, मरीज और यात्री कम समय में पटना जंक्शन से ISBT तक का सफर तय कर सकेंगे।