राहुल गांधी का बड़ा वार नफरत का जहर धीमा होता है, पर जान ले लेता है एंजेल चकमा को कब मिलेगा इंसाफ?

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News India Live, Digital Desk : हम अक्सर गर्व से कहते हैं कि हम 'विविधता' वाले देश में रहते हैं, जहाँ हर रंग और हर भाषा के लिए जगह है। लेकिन जब एंजेल चकमा (Angel Chakma) जैसी कोई खबर सामने आती है, तो ये सारे दावे खोखले नज़र आने लगते हैं। पूर्वोत्तर की रहने वाली एंजेल चकमा के साथ जो हुआ, वह केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि उस नस्ली नफरत (Racism) का जीता-जागता सुबूत है, जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

इस झकझोर देने वाली घटना पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी आवाज़ बुलंद की है। उनकी बातें उन लोगों के लिए एक कड़वा आईना हैं जो नफरत को सिर्फ़ एक पल का गुस्सा समझते हैं।

नफरत का वह कड़वा सच
राहुल गांधी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बहुत ही गहरी बात कही। उन्होंने साफ़ किया कि, "नफरत कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो रातों-रात किसी के मन में पैदा हो जाए। यह सालों की उस नफरती सोच का नतीजा है, जिसे धीमे-धीमे समाज की रगों में भरा गया है।" एंजेल चकमा की जान लेना एक मानसिक बीमारी और नस्लीय भेदभाव (Racist attack) की वो चरम सीमा है, जिसका खामियाजा अब पूरा देश भुगत रहा है।

क्या पूर्वोत्तर के लोग आज भी बाहरी हैं?
आज 2025 में भी हमारे बीच ऐसे लोग मौजूद हैं जो शक्ल, खान-पान या लहजे के आधार पर भेदभाव करते हैं। एंजेल चकमा जैसे कई नौजवान हमारे महानगरों में अपनी पहचान बनाने आते हैं, लेकिन उन्हें अक्सर 'पराया' होने का अहसास कराया जाता है। राहुल गांधी की प्रतिक्रिया इसी दर्द की तरफ इशारा करती है कि हमें कानून से ज्यादा समाज को बदलने की जरूरत है। अगर आज भी कोई सिर्फ इसलिए असुरक्षित है क्योंकि वह अलग दिखता है, तो हमारा विकास सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित है।

इंसाफ की पुकार
राहुल गांधी ने साफ़ कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ़ गिरफ्तारी ही काफी नहीं है, बल्कि उस नफरती विचारधारा (Ideology of hate) को उखाड़ फेंकना होगा जो युवाओं को अपराधियों में बदल रही है। पूरे पूर्वोत्तर और मानवता में यकीन रखने वाले लोग इस वक्त इंसाफ की मांग कर रहे हैं। वे पूछ रहे हैं कि आख़िर कब तक हम अपनों की लाशें ढोते रहेंगे और खामोश रहेंगे?

सिर्फ़ बयान नहीं, बदलाव चाहिए
हकीकत तो ये है कि जब तक हम स्कूलों, कॉलेजों और सड़कों पर 'इंसानियत' को प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक ऐसे कई 'एंजेल' हमारी लापरवाही का शिकार होते रहेंगे। राहुल गांधी का ये बयान हमें चेतावनी दे रहा है कि अगर अब भी हमने भाईचारे की रक्षा नहीं की, तो यह आग सबको अपनी चपेट में ले लेगी।

आज हमें सिर्फ़ शोक नहीं मनाना चाहिए, बल्कि इस संकल्प के साथ खड़े होना चाहिए कि हम नफरत को हराएंगे—ताकि अगली बार किसी मां को अपने बच्चे की ऐसी तस्वीर न देखनी पड़े।