कतर का ईरान को तगड़ा झटका 24 घंटे में देश छोड़ें ईरानी अधिकारी, मिसाइल हमले के बाद दोहा ने सुनाई अंतिम चेतावनी
News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट (Middle East) के दो मुस्लिम देशों के बीच दशकों पुराने संबंध अब युद्ध की कगार पर पहुँच गए हैं। कतर के रास लफान (Ras Laffan) गैस प्लांट पर हुए भीषण मिसाइल हमले से गुस्साए कतर ने ईरान के खिलाफ कड़ा 'डिप्लोमैटिक एक्शन' लिया है। कतर सरकार ने सभी ईरानी दूतावास अधिकारियों और कर्मचारियों को अगले 24 घंटे के भीतर देश छोड़कर जाने का अल्टीमेटम (Persona Non Grata) थमा दिया है।
ईरानी राजदूत को किया गया तलब: "यह पीठ में छुरा घोंपने जैसा"
कतर के विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजदूत को तलब कर सख्त विरोध दर्ज कराया है। कतर का कहना है कि एक तरफ जहाँ कतर हमेशा से ईरान और पश्चिम के बीच मध्यस्थता करता रहा है, वहीं ईरान ने उसके सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी हब को निशाना बनाकर विश्वासघात किया है।
कतर की कार्रवाई के 3 मुख्य बिंदु:
राजनयिक निष्कासन: ईरानी दूतावास के स्टाफ को देश से निकलने के लिए सिर्फ 24 घंटे का समय दिया गया है।
उड़ानों पर रोक: कतर एयरवेज (Qatar Airways) ने तेहरान जाने वाली अपनी सभी उड़ानें अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दी हैं।
सुरक्षा अलर्ट: कतर ने अपनी सीमाओं और तटों पर 'हाई अलर्ट' घोषित कर दिया है ताकि किसी भी अन्य संभावित हमले को रोका जा सके।
क्यों भड़का है कतर?
कतर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ उसका गैस निर्यात है। रास लफान प्लांट पर हुए हमले से कतर को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, कतर का मानना है कि यह हमला ईरान की ओर से एक सोची-समझी साजिश है ताकि कतर को अमेरिका और इजरायल के करीब जाने से रोका जा सके।
ईरान की सफाई और 'साउथ पार्स' का पेच
ईरान ने इस हमले में सीधा हाथ होने से इनकार किया है, लेकिन कतर के पास मौजूद खुफिया इनपुट्स ईरान की ओर इशारा कर रहे हैं। दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्र 'साउथ पार्स/नॉर्थ डोम' को साझा करते हैं। विशेषज्ञों का डर है कि अगर यह कूटनीतिक दरार नहीं भरी, तो इस साझा गैस फील्ड में उत्पादन ठप हो सकता है, जिससे दुनिया भर में गैस की सप्लाई रुक जाएगी।
क्या युद्ध की आहट है?
कतर द्वारा ईरानी अधिकारियों को निकालना इस बात का संकेत है कि बातचीत के रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और कतर की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाने पर विचार कर रहा है।