दलजीत सिंह के शव को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हिंसक भिड़ंत
पंजाब के गुरदासपुर में एक दिल दहला देने वाला और तनावपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प के बाद पुलिस बल ने भारी विरोध के बीच मृतक दलजीत सिंह के शव को अपने कब्जे में ले लिया। गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक क्षेत्र के शाहपुर जाजन गांव के रहने वाले 26 वर्षीय युवक दलजीत सिंह की हाल ही में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर था। न्याय की मांग को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर धरना दिया हुआ था और शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्थिति तब बेकाबू हो गई जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को हटाकर शव को अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगी। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और तीखी बहस हुई। इंटरनेट पर वायरल हो रहे इस घटना के वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह पंजाब पुलिस के जवान प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलते हुए और परिजनों की चीख-पुकार के बीच शव को स्ट्रेचर समेत घसीटकर अपने वाहन में लादकर ले गए, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया है।
दलजीत सिंह की मौत का पूरा मामला और परिजनों द्वारा लगाया गया पुलिस पर गंभीर आरोप
शाहपुर जाजन गांव का निवासी दलजीत सिंह बीते दिनों अपने घर से निकला था, जिसके बाद वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस द्वारा एक पुराने मामले में पूछताछ के नाम पर उसे हिरासत में लिया गया था या फिर उसे अवैध रूप से प्रताड़ित किया गया था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि पुलिस प्रशासन इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे आपसी रंजिश या नशे के ओवरडोज से जुड़ा मामला बता रहा है। दलजीत की मौत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, वहां मातम और रोष का माहौल बन गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है और बिना निष्पक्ष जांच के मामले को दबाना चाहती है। निष्पक्ष जांच, दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप की मांग को लेकर दलजीत के परिजनों ने शव के साथ डेरा बाबा नानक रोड पर चक्काजाम कर दिया।
प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की बर्बरता का वीडियो वायरल: सड़क पर परिजनों का हाहाकार
सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात को जब धरना प्रदर्शन कई घंटों तक जारी रहा और यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया, तो भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर धरना समाप्त करने और शव को पोस्टमार्टम/अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की बात कही। लेकिन परिजन इस बात पर अड़े रहे कि जब तक एफआईआर दर्ज कर दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे शव को सड़क से नहीं हटाएंगे। इसके बाद स्थिति अचानक हिंसक हो गई। पुलिस जवानों ने बल प्रयोग करते हुए रोती-बिलखती महिलाओं और बुजुर्गों को सड़क से हटाना शुरू कर दिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि दलजीत के परिजन शव से लिपटकर रो रहे थे और पुलिस जवानों से गुहार लगा रहे थे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने परिजनों को जबर्दस्ती पीछे धकेला और शव को स्ट्रेचर पर रखकर तेजी से घसीटते हुए पुलिस गाड़ी में डाल दिया। इस दौरान कई स्थानीय ग्रामीणों को मामूली चोटें भी आईं और परिजनों के रोने-बिलखने से पूरा इलाका दहल उठा।
पुलिस प्रशासन का दावा: कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शव को कब्जे में लेना पड़ा
गुरदासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घटना पर सफाई देते हुए कहा कि सड़क जाम होने के कारण आम जनता, एम्बुलेंस और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। पुलिस का कहना है कि उन्होंने परिजनों से कई बार बातचीत की कोशिश की, लेकिन जब असामाजिक तत्व स्थिति का फायदा उठाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने लगे, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शव को अस्पताल पहुंचाना अनिवार्य हो गया था। पुलिस का दावा है कि शव का पैनल डॉक्टरों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम कराया जाएगा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी होगी। यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी, हत्या या प्रताड़ना की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद गुरदासपुर में भारी तनाव: राजनीतिक हलकों में भी उबाल
इस खौफनाक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलने के बाद पंजाब की भगवंत मान सरकार और पंजाब पुलिस विपक्षी दलों के निशाने पर आ गई है। शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई को मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन और अमानवीय करार दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और पुलिस आम नागरिकों की सुरक्षा करने के बजाय पीड़ित परिवारों पर ही लाठियां भांज रही है। फिलहाल गांव शाहपुर जाजन और डेरा बाबा नानक में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके, लेकिन स्थानीय जनता में पुलिस के प्रति भारी रोष व्याप्त है।