पंजाब को नशे का अंत करने के लिए बीजेपी की जरूरत

पंजाब को नशे का अंत करने के लिए बीजेपी की जरूरत

पंजाब की राजनीति में उस समय बड़ा सियासी भूचाल आ गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के तीन प्रमुख पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं—कुंवर विजय प्रताप सिंह, चेतन सिंह जोड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा—ने आम आदमी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया। नई दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में वरिष्ठ केंद्रीय व राज्य नेताओं की मौजूदगी में 'कमल' का पटका पहनते हुए इन बागी नेताओं ने भगवंत मान सरकार और आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। बागी नेताओं ने एक सुर में कहा कि पंजाब इस समय अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है और राज्य को नशे की लत, भ्रष्टाचार तथा बढ़ते गैंगस्टर कल्चर के चंगुल से बाहर निकालने के लिए अब पंजाब में बीजेपी सरकार का आना बेहद जरूरी हो गया है।

आम आदमी पार्टी के बागी नेताओं का बड़ा हमला: नशे और कानून-व्यवस्था पर सरकार पूरी तरह विफल

बीजेपी में शामिल होने के तुरंत बाद पूर्व आईपीएस अधिकारी और विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब के वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक हालात पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बदलाव और क्रांति का वादा करके सत्ता में आई आम आदमी पार्टी ने पंजाब की जनता के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात किया है। राज्य में नशे का नेटवर्क एक संगठित उद्योग बन चुका है, जिसके जाल में पंजाब की युवा पीढ़ी तेजी से बर्बाद हो रही है। इसके साथ ही राज्य में रंगदारी वसूलने, अपराध और गैंगस्टरवाद का बोलबाला अपने चरम पर पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि भगवंत मान सरकार इन समस्याओं को रोकने में पूरी तरह से लाचार और विफल साबित हुई है, और केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व वाली बीजेपी ही पंजाब को इस गहरे संकट से उबार सकती है।

'रंगला पंजाब' का सपना हुआ चकनाचूर: जनहित के मुद्दों को उठाने वाले नेताओं की हो रही अनदेखी

पार्टी छोड़ने वाले पूर्व मंत्री चेतन सिंह जोड़ामाजरा और विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने भी आम आदमी पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल खड़े किए। नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक चुकी है और जो नेता पंजाब के जमीनी मुद्दों, किसानों, युवाओं व विकास की बात करते हैं, उन्हें व्यवस्थित तरीके से किनारे कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि 'रंगला पंजाब' बनाने का सपना दिखाकर राज्य को भारी कर्ज और अराजकता की ओर धकेल दिया गया है। विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाने की आजादी नहीं दी जा रही थी और आवाज उठाने पर उल्टे फर्जी केस दर्ज कराने की धमकियां दी जा रही थीं।

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब में सियासी समीकरणों की नई बिसात

पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच आम आदमी पार्टी के विधायकों का बीजेपी में शामिल होना राज्य के राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे रहा है। मालवा और माझा क्षेत्र के मजबूत जनाधार वाले इन नेताओं के आने से राज्य में बीजेपी के सांगठनिक ढांचे को नई मजबूती मिली है। बागी नेताओं ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी पद या सत्ता का लालच नहीं है, बल्कि उनका इकलौता मकसद पंजाब को नशा-मुक्त, अपराध-मुक्त और पारदर्शी शासन की राह पर वापस लाना है। उन्होंने पंजाब की जनता से अपील की कि वे अब इस तथाकथित बदलाव के धोखे से बाहर निकलकर राज्य के पुनरुत्थान के लिए एकजुट होकर बीजेपी का समर्थन करें।

आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया और पंजाब की भावी राजनीति का रास्ता

दूसरी ओर, विधायकों के अचानक पाला बदलने से आम आदमी पार्टी खेमे में भी हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ताओं ने इन नेताओं के जाने को व्यक्तिगत स्वार्थ और अनुशासनहीनता करार देते हुए पलटवार किया है, वहीं विधानसभा अध्यक्ष से इनकी विधायकी रद्द करने की सिफारिश भी की गई है। हालांकि, बागी नेताओं का यह दावा कि 'पंजाब को बचाने के लिए सिर्फ बीजेपी ही एकमात्र विकल्प है', राज्य के मुख्य सियासी विमर्श का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नशे के अंत और सख्त कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर शुरू हुआ यह राजनीतिक संग्राम पंजाब की सियासत को किस दिशा में ले जाता है।