शव को हीट देकर अंदरूनी हिस्से ढीले करने की तैयारी, इंसाफ मोर्चा हुआ पोस्टपोन
पूरे इलाके में न्याय और निष्पक्ष जांच को लेकर चर्चा का केंद्र बने चर्चित 'झोटा' मामले में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया एक बार फिर प्रशासनिक और फॉरेंसिक वजहों से अटक गई है। पशु विशेषज्ञों और फॉरेंसिक सर्जनों की संयुक्त टीम द्वारा जब शव की गहन जांच शुरू की गई, तो पाया गया कि मौत के बाद कई दिन बीत जाने और शव के कड़े (Rigor Mortis & Decomposition) हो जाने के कारण अंदरूनी अंगों का सटीक फॉरेंसिक अध्ययन करना बेहद जटिल हो गया है। डॉक्टरों की टीम ने स्पष्ट किया है कि बिना अंदरूनी हिस्सों को सामान्य स्थिति में लाए अगर जबरन चीर-फाड़ की गई, तो जांच के अहम साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं। इस तकनीकी अड़चन से निपटने के लिए फॉरेंसिक वैज्ञानिकों ने शव को विशेष हीट (ऊष्मा) देकर उसके अंदरूनी ऊतकों और मांसपेशियों को ढीला करने की आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक अपनाने का फैसला किया है। इस प्रक्रिया में समय लगने के कारण पोस्टमार्टम की पूरी रिपोर्ट आने में अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
शव को हीट देकर मांसपेशियों को ढीला करने की तैयारी, वैज्ञानिक मानकों के तहत होगी जांच
फॉरेंसिक लैब के विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों का कहना है कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई इस मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए शव के हर अंदरूनी हिस्से का सही सलामत मिलना बेहद आवश्यक है। शरीर के अकड़ जाने के कारण फेफड़ों, दिल, पेट की नलियों और विसरा नमूनों (Viscera Samples) को सुरक्षित निकालना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसी वजह से डॉक्टरों द्वारा नियंत्रित तापमान और विशेष ऊष्मा (Controlled Heat Therapy) का सहारा लिया जा रहा है, ताकि आंतरिक अंग लचीले हो सकें और पोस्टमार्टम के दौरान फॉरेंसिक टीम जहरीले पदार्थों, आंतरिक चोटों या किसी भी प्रकार की साजिश के साक्ष्यों का सटीकता से विश्लेषण कर सके। पुलिस और मेडिकल बोर्ड का दावा है कि भले ही जांच में थोड़ा समय अधिक लग रहा है, लेकिन किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने के लिए वैज्ञानिक और कानूनी मानकों का 100 प्रतिशत पालन किया जा रहा है ताकि रिपोर्ट अदालत में टिक सके।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी के चलते 'इंसाफ मोर्चा' पोस्टपोन, आयोजकों ने जताई नाराजगी पर शांति की अपील
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया दोबारा लटकने और फॉरेंसिक जांच में अतिरिक्त समय लगने की खबर सामने आते ही पीड़ित पक्ष और समर्थन में उतरे स्थानीय ग्रामीणों में बेचैनी बढ़ गई है। मामले में न्याय की मांग को लेकर गठित 'इंसाफ मोर्चा' द्वारा आयोजित किए जाने वाले बड़े विरोध प्रदर्शन और महापंचायत को फिलहाल प्रशासनिक अनुरोध और मेडिकल रिपोर्ट के इंतजार में पोस्टपोन (स्थगित) कर दिया गया है। मोर्चा के प्रमुख संयोजकों ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी कि जब तक पोस्टमार्टम की आधिकारिक रिपोर्ट और फॉरेंसिक निष्कर्ष सामने नहीं आ जाते, तब तक मोर्चा अपनी अगली रणनीति को अंतिम रूप नहीं देगा। हालांकि, आयोजकों ने चेतावनी दी है कि वे प्रशासन की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं और यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की हेराफेरी या देरी के नाम पर मामले को दबाने की कोशिश की गई, तो वे और अधिक उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद है।