स्वर्ण मंदिर के सिख संग्रहालय में लगेगी परविंदर सिंह झोटा की तस्वीर

स्वर्ण मंदिर के सिख संग्रहालय में लगेगी परविंदर सिंह झोटा की तस्वीर

अमृतसर स्थित विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) परिसर में बने केंद्रीय सिख संग्रहालय (Central Sikh Museum) में सिख इतिहास, धर्म, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों की तस्वीरें लगाई जाती हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घोषणा की है। एसजीपीसी अध्यक्ष ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि हरियाणा के जाने-माने किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की तस्वीर को भी स्वर्ण मंदिर के इस प्रतिष्ठित संग्रहालय में स्थापित किया जाएगा।

यह घोषणा सामने आते ही सिख पंथ और किसान संगठनों के बीच एक अलग ही प्रकार की भावना और संतोष की लहर दौड़ गई है। परविंदर सिंह झोटा ने अपने जीवनकाल में सामाजिक सरोकारों, किसानों के अधिकारों और धार्मिक मुद्दों को लेकर जो कड़ा संघर्ष किया था, उसे अब संस्थागत रूप से मान्यता और सर्वोच्च सम्मान मिलने जा रहा है। एसजीपीसी के इस कदम को उनके द्वारा समाज और कौम के लिए दिए गए बलिदान के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में देखा जा रहा है।

#1 कौन थे परविंदर सिंह झोटा? जानिए उनके संघर्ष और सामाजिक योगदान की कहानी

परविंदर सिंह झोटा हरियाणा के एक ऐसे युवा और जुझारू नेता थे, जिन्होंने हमेशा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और समाज के दबे-कुचले लोगों के साथ-साथ किसानों के हितों की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। उन्होंने हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में कई बड़े सामाजिक आंदोलनों का नेतृत्व किया था। गौवंश की रक्षा, किसानों के हक की लड़ाई और सामाजिक व धार्मिक कुप्रथाओं के खिलाफ खुलकर खड़े होने के कारण वे युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हो गए थे।

उनके जीवन का सफर संघर्षों से भरा रहा था। विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाने के दौरान उन्हें कई बार प्रशासनिक और कानूनी बाधाओं का भी सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया। उनके इसी निडर स्वभाव और जनहित के कार्यों ने उन्हें हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत के सिख समुदाय और किसान संगठनों के बीच एक आइकॉन बना दिया था। कम उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह जाने वाले परविंदर सिंह झोटा की यादें आज भी उनके समर्थकों के दिलों में जिंदा हैं।

#1 एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने क्यों लिया यह बड़ा फैसला?

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने यह घोषणा करते हुए कहा कि सिख कौम और मानवता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले या जीवन समर्पित करने वाले योद्धाओं व सेवकों को याद रखना और उनका सम्मान करना हमारा मुख्य कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि परविंदर सिंह झोटा ने जिस निष्ठा और बहादुरी के साथ सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

एसजीपीसी अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय सिख संग्रहालय में किसी भी शख्सियत की तस्वीर को स्थान देने से पहले उसकी पूरी जीवनी, समाज में उसके योगदान और पंथ के प्रति उसकी सेवाओं का गहन मूल्यांकन किया जाता है। परविंदर सिंह झोटा के मामलों में उनकी शहादत और समाज के प्रति अटूट समर्पण को देखते हुए ही प्रबंधन समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि उनकी तस्वीर को संग्रहालय की मुख्य गैलरी में सुशोभित किया जाएगा। इस फैसले से उनके परिवार और पैतृक क्षेत्र के लोगों में गर्व की भावना देखी जा रही है।

#1 सिख संग्रहालय की परंपरा: कौम के नायकों को सहेजने का ऐतिहासिक केंद्र

अमृतसर के हरमंदिर साहिब परिसर में स्थित केंद्रीय सिख संग्रहालय सिख इतिहास का सबसे जीवंत और पवित्र दस्तावेज माना जाता है। यहाँ गुरुओं के काल से लेकर आधुनिक युग तक उन सभी महान संतों, योद्धाओं, विचारकों, शहीदों और समाज सुधारकों की तस्वीरें और वस्तुएं सहेजी जाती हैं, जिन्होंने सिख पंथ, देश और मानवता के लिए अतुलनीय योगदान दिया है। इस संग्रहालय में प्रवेश करते ही इतिहास के वे पन्ने ताजा हो जाते हैं, जिन्होंने देश और समाज को एक नई दिशा दी थी।

परविंदर सिंह झोटा की तस्वीर को इस संग्रहालय में स्थान मिलने से हरियाणा के युवाओं और सिख समुदाय में यह संदेश गया है कि यदि कोई व्यक्ति पूरी ईमानदारी और निस्वार्थ भाव से समाज सेवा के मार्ग पर चलता है, तो इतिहास और धार्मिक संस्थाएं उसे कभी नहीं भूलतीं। संग्रहालय में तस्वीर अनावरण को लेकर एक भव्य धार्मिक समागम आयोजित किए जाने की भी संभावना है, जिसमें देश भर से प्रमुख किसान नेता, संत समाज और एसजीपीसी के पदाधिकारी शिरकत करेंगे।

#1 परिवार और समर्थकों में खुशी की लहर, श्रद्धांजलि सभाओं का दौर शुरू

एसजीपीसी द्वारा की गई इस आधिकारिक घोषणा के बाद परविंदर सिंह झोटा के पैतृक गांव और उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हरजिंदर सिंह धामी और एसजीपीसी प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि यह फैसला न केवल एक व्यक्ति का सम्मान है, बल्कि यह उन तमाम युवाओं के संघर्ष की जीत है जो जमीन पर रहकर समाज के लिए लड़ते हैं। आने वाले दिनों में स्वर्ण मंदिर परिसर में होने वाले इस तस्वीर अनावरण समारोह को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है।