पंजाब पुलिस के पूर्व DIG इंद्रजीत सिंह सिद्धू चंडीगढ़ की सड़कों पर खुद उठाते दिखे कूड़ा

पंजाब पुलिस के पूर्व DIG इंद्रजीत सिंह सिद्धू चंडीगढ़ की सड़कों पर खुद उठाते दिखे कूड़ा

देशभर में स्वच्छता अभियानों और नागरिकों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर तमाम तरह की बातें की जाती हैं, लेकिन जब कोई सम्मानित हस्ती खुद अपने हाथों से झाड़ू उठाकर सड़कों पर उतर आती है, तो वह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन जाती है। पंजाब पुलिस के सेवानिवृत्त उप महानिरीक्षक (DIG), प्रख्यात समाजसेवी और प्रतिष्ठित 'पद्म श्री' पुरस्कार से सम्मानित इंद्रजीत सिंह सिद्धू (Inderjit Singh Sidhu) ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जनसेवा और देश के प्रति कर्तव्य की कोई उम्र नहीं होती है। हाल ही में चंडीगढ़ से एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जहां 88 वर्षीय बुजुर्ग इंद्रजीत सिंह सिद्धू को चंडीगढ़ के सेक्टर-49 स्थित आईपीएस सोसाइटी के पास सड़क किनारे पड़े कचरे को खुद साफ करते हुए देखा गया। उनके इस सादगी भरे और अनुकरणीय कार्य का वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म्स पर जंगल में आग की तरह फैल रहा है और लोग उनकी जमकर सराहना कर रहे हैं। चंडीगढ़ में अपने इस अनूठे और निरंतर चलने वाले स्वच्छता अभियान के कारण उन्हें प्यार से 'झाड़ू योद्धा' (Jhadu Yoddha) के नाम से जाना जाता है। आइए इस महान शख्सियत के जीवन और उनके इस प्रेरणादायक अभियान की गहराई से पड़ताल करते हैं।

इंद्रजीत सिंह सिद्धू का पूरा जीवन अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने पंजाब पुलिस में डीआईजी (DIG) जैसे सर्वोच्च और जिम्मेदार पदों पर रहते हुए अपनी सेवाएं पूरी ईमानदारी के साथ निभाईं। पुलिस सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद जहां अधिकांश लोग अपने घरों में आराम की जिंदगी बिताना पसंद करते हैं, वहीं सिद्धू साहब ने समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को एक नया आयाम दिया। वे पिछले कई वर्षों से चंडीगढ़ की सड़कों, पार्कों और रिहायशी इलाकों में खुद झाड़ू लेकर निकल पड़ते हैं और वहां फैले कचरे को साफ करते हैं। उनके इसी समर्पण और लगातार स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से अलंकृत किया था। स्थानीय लोग और प्रशासन उन्हें प्यार से 'झाड़ू योद्धा' कहकर पुकारते हैं क्योंकि उन्होंने शहर को साफ-सुथरा रखने को अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य बना लिया है।

चंडीगढ़ के सेक्टर-49 स्थित प्रतिष्ठित आईपीएस सोसाइटी के पास की यह घटना तब चर्चा का केंद्र बन गई जब सुबह के वक्त 88 वर्षीय इंद्रजीत सिंह सिद्धू को साधारण कपड़ों में हाथ में सफाई करने का उपकरण और कचरा उठाने वाला बैग लेकर सड़क किनारे पड़े मलबे और प्लास्टिक को साफ करते हुए देखा गया। वहां से गुजर रहे कुछ स्थानीय नागरिकों ने जब इस बुजुर्ग हस्ती को इस अवस्था में श्रमदान करते देखा, तो वे हैरान रह गए। किसी ने इस पूरे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो सामने आने के कुछ ही घंटों के भीतर यह इंटरनेट पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके चेहरे पर समाज के लिए कुछ कर गुजरने का वही पुराना उत्साह और ऊर्जा नजर आ रही है, जो युवाओं के लिए भी एक बड़ा सबक है।

आज के दौर में जब लोग अपनी गली और मोहल्ले की गंदगी के लिए सीधे तौर पर प्रशासन या नगर निगम को जिम्मेदार ठहराकर पल्ला झाड़ लेते हैं, तब एक पद्म श्री सम्मानित और पूर्व पुलिस अधिकारी का इस प्रकार खुद सड़क पर उतरकर कूड़ा उठाना एक बहुत बड़ा सामाजिक संदेश देता है। यह इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छता केवल सरकार या सफाई कर्मचारियों का ही काम नहीं है, बल्कि यह हर एक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है। इंद्रजीत सिंह सिद्धू का यह कदम यह सिखाता है कि जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास के परिवेश को साफ रखने की जिम्मेदारी खुद नहीं उठाएगा, तब तक देश को पूरी तरह स्वच्छ बनाने का सपना पूरा नहीं हो सकता। उनका यह प्रयास शहर के युवाओं और नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहा है कि वे दिखावे की जिंदगी से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर समाज के लिए कुछ सकारात्मक योगदान दें।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद से ही चंडीगढ़ प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और देश भर के नेटिज़न्स द्वारा इंद्रजीत सिंह सिद्धू की जमकर तारीफ की जा रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे लोग समाज की असली ताकत और धरोहर होते हैं जो बिना किसी स्वार्थ या प्रचार की चाह के चुपचाप अपना काम करते रहते हैं। रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन और स्थानीय नागरिकों ने भी उनके इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का संकल्प लिया है। 88 वर्ष की उम्र में भी उनका यह हौसला इस बात की गवाही देता है कि सच्ची देशभक्ति और सेवाHभाव उम्र के मोहताज नहीं होते। 'झाड़ू योद्धा' के रूप में मशहूर हो चुके इंद्रजीत सिंह सिद्धू आज हर उस व्यक्ति के लिए एक आदर्श हैं जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं और जिनकी बदौलत हमारे देश का भविष्य उज्जवल और स्वच्छ नजर आता है।