Modified UDAN Scheme: हवाई सफर करने वालों की बल्ले-बल्ले, ₹28,840 करोड़ से शुरू हुई 'मॉडिफाइड उड़ान', जानिए 100 नए एयरपोर्ट और सस्ती टिकट का पूरा प्लान
भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को सस्ता, सुलभ और टिकाऊ बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने 'संशोधित उड़ान' (Modified UDAN Scheme) का ऐतिहासिक आगाज कर दिया है। वर्ष 2016 में शुरू की गई मूल आरसीएस-उड़ान (RCS-UDAN) योजना ने देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों को पहली बार हवाई नक्शे पर लाकर खड़ा किया था। अब सरकार ने पिछले अनुभवों, कैग (CAG) की सिफारिशों और एयरलाइंस की परिचालन चुनौतियों को दूर करते हुए इसे एक नए और बेहद मजबूत ढांचे में ढाला है। वित्त वर्ष 2026–27 से वित्त वर्ष 2035–36 तक अगले 10 वर्षों के लिए ₹28,840 करोड़ के कुल बजटीय परिव्यय के साथ यह योजना देश के कोने-कोने में कनेक्टिविटी का नया जाल बिछाने जा रही है।
इस संशोधित योजना का मुख्य मकसद केवल नए हवाई रूट शुरू करना नहीं, बल्कि उन्हें लंबे समय तक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाना है। देश में आज घरेलू विमानन बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन छोटे शहरों में अक्सर सब्सिडी खत्म होते ही उड़ानें बंद हो जाती थीं। संशोधित उड़ान योजना में इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला गया है, ताकि छोटे और मझोले शहरों के आम यात्रियों को साल के 365 दिन बिना रुकावट सस्ती और समयबद्ध हवाई यात्रा का सीधा फायदा मिल सके।
100 नए एयरोड्रोम और 200 आधुनिक हेलीपैड: कनेक्टिविटी का नया ढांचा
संशोधित उड़ान योजना के तहत देश के दूरदराज, आकांक्षी (Aspirational) और पर्यटन क्षेत्रों को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है। योजना के तहत पहले से मौजूद लेकिन अनुपयोगी पड़ी हवाई पट्टियों (Airstrips) को आधुनिक बनाते हुए 'चैलेंज मोड' में 100 नए एयरोड्रोम/हवाई अड्डे विकसित किए जाएंगे। इसके लिए 8 वर्षों की अवधि में ₹12,159 करोड़ का विशेष बजट आवंटित किया गया है। इससे उन छोटे कस्बों में भी नियमित कमर्शियल उड़ानें पहुंच सकेंगी, जहां के लोगों को फ्लाइट पकड़ने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर बड़े महानगरों में जाना पड़ता था।
इसके साथ ही पहाड़ी, पूर्वोत्तर, सीमावर्ती और द्वीपीय इलाकों में कनेक्टिविटी की सबसे बड़ी बाधा को दूर करने के लिए ₹3,661 करोड़ की लागत से 200 अत्याधुनिक हेलीपैड बनाए जाएंगे। प्रत्येक हेलीपैड के लिए औसतन ₹15 करोड़ का प्रावधान रखा गया है, ताकि मेडिकल इमरजेंसी, आपदा राहत और दुर्गम इलाकों में हेलीकॉप्टर सेवाएं हर मौसम में चालू रह सकें। छोटे रनवे और जल क्षेत्रों के लिए सी-प्लेन (Water Aerodromes) के बुनियादी ढांचे को भी इस योजना का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।
वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) और O&M सपोर्ट: अब बंद नहीं होंगी छोटे शहरों की उड़ानें
मूल उड़ान योजना में सबसे बड़ी खामी यह देखी गई थी कि 3 साल की सरकारी सब्सिडी खत्म होते ही एयरलाइंस छोटे शहरों के रूट बंद कर देती थीं। संशोधित उड़ान योजना में इस नीति को पूरी तरह बदल दिया गया है। एयरलाइंस को नए रूटों पर यात्री संख्या बढ़ाने और वित्तीय स्थिरता हासिल करने के लिए 10 वर्षों में ₹10,043 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) दी जाएगी। इसके अलावा सब्सिडी की अवधि को भी व्यावहारिक बनाते हुए बढ़ाया गया है, जिससे विमानन कंपनियों को घाटे का डर नहीं रहेगा और आम जनता को तय सीमा पर किफायती टिकट मिलते रहेंगे।
इसके अतिरिक्त, पहली बार हवाई अड्डों के दैनिक संचालन और रखरखाव के लिए सरकार ने अलग से 'ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस' (O&M) सहायता का प्रावधान किया है। इसके तहत लगभग 441 छोटे एयरोड्रोम, हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम को 3 वर्षों के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। प्रत्येक आरसीएस हवाई अड्डे को सालाना अधिकतम ₹3.06 करोड़ और हेलीपोर्ट को ₹90 लाख तक की मेंटेनेंस मदद मिलेगी। इससे कम उड़ानों वाले छोटे एयरपोर्ट बंद होने से बचेंगे और उनकी परिचालन लागत का बोझ स्थानीय प्रशासन पर नहीं पड़ेगा।
आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी विमान और हेलीकॉप्टर भरेंगे दुर्गम इलाकों में उड़ान
संशोधित उड़ान योजना की एक और अनूठी विशेषता इसका 'आत्मनिर्भर भारत' मॉडल है। भारत के दुर्गम और छोटे रनवे वाले इलाकों में बड़े बोइंग या एयरबस विमान लैंड नहीं कर सकते, जिसके कारण छोटे फिक्स्ड-विंग विमानों और हेलीकॉप्टरों की भारी कमी महसूस की जा रही थी। इस कमी को दूर करने के लिए योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित स्वदेशी विमानों की सीधी तैनाती का फैसला किया गया है।
इसके अंतर्गत सरकारी विमानन कंपनी एलायंस एयर (Alliance Air) के बेड़े में दो एचएएल डोर्नियर (HAL Dornier-228) विमान और पवन हंस (Pawan Hans) के बेड़े में दो एचएएल ध्रुव (HAL Dhruv ALH) हेलीकॉप्टरों को शामिल किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर निर्मित इन विमानों के संचालन से न केवल देश में घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इनके कलपुर्जों और रखरखाव के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता भी खत्म होगी।
आम यात्रियों को क्या-क्या होगा सीधा फायदा? जानिए A to Z असर
संशोधित उड़ान योजना केवल विमानन कंपनियों या बुनियादी ढांचे का विस्तार नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ सीधे आम आदमी की जेब और यात्रा के समय पर पड़ेगा। इसके तहत लगभग 50% सीटों पर सरकार द्वारा तय 'फेयर कैप' (किराया सीमा) लागू रहती है, जिससे प्रति घंटे की उड़ान का किराया आम बजट के अनुकूल बना रहता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से सीधे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों तक उड़ानें शुरू होने से व्यापार, रोजगार और स्थानीय पर्यटन को जबरदस्त पंख लगेंगे।
इसके साथ ही, आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में मरीज को बड़े अस्पताल ले जाने के लिए लगने वाले 10 से 12 घंटे का सड़क का सफर अब मात्र 45 से 60 मिनट की हवाई यात्रा में बदल सकेगा। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के साझा सहयोग (जीएसटी छूट, वैट में कमी और निःशुल्क सुरक्षा व अग्निशमन सेवाएं) से चलने वाली यह संशोधित उड़ान योजना आने वाले दशक में भारत के हर नागरिक के हवाई सफर के सपने को हकीकत में बदलने का सबसे बड़ा माध्यम साबित होगी।