जालंधर में गहराया बिजली संकट! अघोषित कटौती से भड़के किसानों ने किया शक्ति सदन का घेराव, दी बड़े आंदोलन की उग्र चेतावनी

जालंधर में गहराया बिजली संकट! अघोषित कटौती से भड़के किसानों ने किया शक्ति सदन का घेराव, दी बड़े आंदोलन की उग्र चेतावनी

पंजाब के जालंधर जिले में अघोषित बिजली कटौती को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। भीषण गर्मी और धान की बुआई के इस सीजन में पावर कट से परेशान किसानों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों और भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने जालंधर स्थित बिजली विभाग के मुख्य कार्यालय 'शक्ति सदन' का अनिश्चितकालीन घेराव कर दिया है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पहुंचे आक्रोशित किसानों ने पंजाब सरकार और पावरकॉम (PSPCL) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि यदि उन्हें खेती और घरेलू इस्तेमाल के लिए तुरंत निर्बाध बिजली नहीं मिली, तो यह प्रदर्शन एक बड़े सूबेव्यापी आंदोलन का रूप ले लेगा।

धान की सीजन में अघोषित पावर कट से फसलें सूखने की कगार पर

प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए रोजाना 8 घंटे निर्बाध बिजली देने का वादा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। जालंधर के ग्रामीण इलाकों जैसे नकोदर, शाहकोट, भोगपुर और करतारपुर में मुश्किल से 3 से 4 घंटे ही बिजली मिल पा रही है, वह भी भारी उतार-चढ़ाव (लो वोल्टेज) के साथ। धान की रोपाई के लिए पानी की भारी जरूरत होती है, लेकिन बिजली न रहने से नलकूप और ट्यूबवेल ठप पड़े हैं। किसानों को डर है कि अगर यही स्थिति रही तो उनकी महंगी फसलें खेतों में ही सूख जाएंगी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

शक्ति सदन के बाहर भारी पुलिस बल तैनात, अफसरों के छूटे पसीने

किसानों के अचानक हुए इस उग्र घेराव के बाद जालंधर पुलिस और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। शक्ति सदन परिसर के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो। बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शनकारी किसानों को समझाने और ग्रिड की तकनीकी कमियों को जल्द दूर करने का आश्वासन देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, किसान किसी भी खोखले वादे को मानने के लिए तैयार नहीं हैं और वे मौके पर ही लिखित गारंटी और पर्याप्त बिजली आपूर्ति की मांग पर अड़े हुए हैं।

स्थानीय व्यापार और आम जनता भी बिजली किल्लत से बेहाल

यह संकट सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। जालंधर शहर और इसके आसपास के कस्बों में भी अघोषित बिजली कटौती ने आम नागरिकों और स्थानीय छोटे व्यापारियों का जीना मुहाल कर दिया है। उमस भरी गर्मी के बीच घंटों बत्ती गुल रहने से इनवर्टर भी जवाब दे गए हैं, जिससे पेयजल संकट भी गहराने लगा है। स्थानीय फैक्ट्रियों और एमएसएमई (MSME) उद्योग में काम ठप होने से कारोबारी नुकसान झेल रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो वे जालंधर-अमृतसर नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम कर देंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।

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