अरमान संधू अपहरण और हत्याकांड में अदालत ने सुनाया न्याय का सबसे बड़ा फैसला

अरमान संधू अपहरण और हत्याकांड में अदालत ने सुनाया न्याय का सबसे बड़ा फैसला

पंजाब के सबसे दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले आपराधिक मामलों में से एक अरमान संधू हत्याकांड में आखिरकार अदालत का अंतिम और सबसे बड़ा फैसला आ गया है। माननीय सेशन कोर्ट ने मासूम अरमान संधू का अपहरण कर उसकी निर्मम हत्या करने वाले दो मुख्य दोषियों को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सख्त सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। इस बहुचर्चित मामले में फैसला आते ही अदालत परिसर में भारी संख्या में स्थानीय नागरिक, कानूनी विशेषज्ञ और पीड़ित परिवार के लोग एकत्र हो गए थे। मासूम अरमान के परिवार के लिए भले ही यह न्याय की एक बड़ी जीत है, लेकिन उस मासूम बच्चे की दर्दनाक यादें आज भी पूरे क्षेत्र की जनता को झकझोर कर रख देती हैं। पुलिस और अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में पेश किए गए अकाट्य सबूतों और गवाहों के आधार पर न्यायाधीश ने इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले अपराधियों को अंतिम सांस तक सलाखों के पीछे रहने का हुक्म जारी किया।

दो करोड़ रुपये की फिरौती के लिए रची थी घिनौनी साजिश, मासूम को तड़पा-तड़पा कर मार डाला

इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई थी जब आरोपियों ने जल्दी अमीर बनने और रातों-रात करोड़ों रुपये कमाने के लालच में अरमान संधू का अपहरण करने की एक खौफनाक साजिश रची। आरोपियों ने बेहद शातिराना तरीके से मासूम बच्चे को उसके घर के पास से अगवा किया और उसे एक गुप्त ठिकाने पर बंधक बनाकर रख लिया। इसके तुरंत बाद ही अपराधियों ने पीड़ित परिवार को फोन कर बच्चे की सलामती के एवज में दो करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती की मांग की। फिरौती की रकम की खबर मिलते ही पीड़ित परिवार और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस को मामले की भनक लगते ही विशेष जांच टीमों का गठन किया गया और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए अपहरणकर्ताओं की लोकेशन ट्रैक करने की कोशिशें शुरू कर दी गईं। हालांकि, जब अपहरणकर्ताओं को यह अहसास हुआ कि पुलिस उनके बेहद करीब पहुंच चुकी है और फिरौती की रकम मिलना नामुमकिन लग रहा है, तो उन्होंने अपनी पहचान छुपाने के डर से मासूम अरमान की बेहद बेरहमी से हत्या कर दी और उसके शव को सुनसान जगह पर फेंक कर फरार हो गए।

पुलिस की फॉरेंसिक जांच और अभियोजन पक्ष के तर्कों से सलाखों के पीछे पहुंचे दरिंदे

अरमान संधू के शव की बरामदगी और इस जघन्य हत्याकांड के बाद पूरे राज्य में जनाक्रोश फैल गया था। पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल, फॉरेंसिक टीम और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीमों को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए मैदान में उतारा। कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक साक्ष्यों की कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस ने आखिरकार दोनों मुख्य आरोपियों को धर दबोचा। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने डीएनए रिपोर्ट, कॉल रिकॉर्डिंग्स और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही के जरिए यह साबित किया कि किस तरह दोनों अभियुक्तों ने योजनाबद्ध तरीके से अपहरण और हत्या के अपराध को अंजाम दिया था। बचाव पक्ष की तमाम दलीलों और सफाई को खारिज करते हुए अदालत ने माना कि दो करोड़ की फिरौती के लालच में एक मासूम बच्चे की जान लेना अक्षम्य अपराध है, और ऐसे अपराधियों को समाज में स्वतंत्र रहने का कोई हक नहीं है। अदालत के इस सख्त रुख से न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिला है बल्कि समाज में अपराधियों को एक कड़ा संदेश भी गया है।