पंजाब कांग्रेस में फिर मची बड़ी रार! हाईकमान से टकराव के मूड में नहीं बागी, चन्नी गुट ने दी 'एक्सपेरिमेंट' न करने की नसीहत

पंजाब कांग्रेस में फिर मची बड़ी रार! हाईकमान से टकराव के मूड में नहीं बागी, चन्नी गुट ने दी 'एक्सपेरिमेंट' न करने की नसीहत

पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। चुनावी तैयारियों और संगठन के पुनर्गठन के बीच पार्टी के भीतर एक बड़े गुट ने अपनी ही लीडरशिप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हालांकि, इस सियासी घमासान के बीच राहत की बात यह है कि बगावत का झंडा बुलंद करने वाले बागी नेता फिलहाल कांग्रेस आलाकमान से सीधा टकराव मोल लेने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। वे अपनी बात को लोकतांत्रिक तरीके से दिल्ली दरबार के सामने रखने की कोशिश में जुटे हैं।

हाईकमान से टकराव से बच रहे बागी नेता, बदलाव की मांग पर अड़े

पार्टी के भीतर उभरे असंतुष्ट और बागी धड़े के नेताओं की ओर से आ रहे बयानों से साफ है कि उनका विरोध प्रदेश स्तर की कार्यप्रणाली को लेकर है, न कि केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ। बागी गुट के एक वरिष्ठ नेता ने गोपनीय बैठक के बाद संकेत दिए कि वे सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के फैसलों का पूरा सम्मान करते हैं और हाईकमान से किसी भी तरह का टकराव नहीं चाहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य केवल पंजाब संगठन में जमीनी हकीकत के हिसाब से जरूरी सुधार और बदलाव करवाना है ताकि आने वाले चुनावों में पार्टी को मजबूत किया जा सके।

चन्नी गुट की दोटूक: यह वक्त नए एक्सपेरिमेंट करने का बिल्कुल नहीं है

दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के वफादार और उनके गुट के नेताओं ने इस अंदरूनी कलह पर बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। चन्नी गुट के दिग्गज नेताओं ने बागी धड़े को नसीहत देते हुए साफ कहा कि पंजाब की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह समय पार्टी के भीतर किसी भी तरह के नए एक्सपेरिमेंट (प्रयोग) करने का बिल्कुल नहीं है। चन्नी समर्थकों का मानना है कि इस नाजुक मोड़ पर नेतृत्व या रणनीति में किसी भी तरह का बदलाव करने से विपक्षी दलों को फायदा पहुंच सकता है और पार्टी का ग्राफ नीचे गिर सकता है।

पंजाब कांग्रेस के इस अंदरूनी दंगल पर दिल्ली की पैनी नजर

विपक्ष को घेरने के बजाय आपस में ही उलझ रहे पंजाब कांग्रेस के इस नए घटनाक्रम ने दिल्ली में बैठे आलाकमान की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पंजाब प्रभारी लगातार दोनों गुटों के नेताओं से संपर्क साध रहे हैं ताकि इस विवाद को सार्वजनिक होने से रोका जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस अंदरूनी कलह और 'चन्नी बनाम बागी गुट' की इस जंग को समय रहते शांत नहीं किया गया, तो पंजाब में कांग्रेस की अंदरूनी बगावत एक बार फिर पार्टी के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बिगाड़ सकती है।

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