Punjab Election 2027: अकाली दल ने फूँका चुनावी बिगुल 17 फरवरी से सुखबीर बादल की रैलियों का शंखनाद

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News India Live, Digital Desk: पंजाब की राजनीति में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 'मिशन 2027' का आगाज कर दिया है। सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में पार्टी 17 फरवरी 2026 से पूरे प्रदेश में विधानसभा वार रैलियों की श्रृंखला शुरू करने जा रही है। विक्रम सिंह मजीठिया की जेल से रिहाई के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश देखा जा रहा है।

1. रैलियों का पहला चरण (17 फरवरी - 28 फरवरी)

अकाली दल ने पहले चरण में उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है जहाँ पार्टी का पारंपरिक आधार मजबूत रहा है:

17 फरवरी: कादियां (Qadian) - यहाँ से रैलियों की शुरुआत होगी।

18 फरवरी: खेमकरण (Khem Karan)

20 फरवरी: जीरा (Zira)

21 फरवरी: अटारी (Attari)

24 फरवरी: फिरोजपुर ग्रामीण (Ferozpur Rural)

26 फरवरी: फरीदकोट (Faridkot)

28 फरवरी: रामपुरा फूल (Rampura Phul)

2. मार्च का प्लान और 'कटाई' ब्रेक

मार्च: पार्टी ने मार्च महीने के लिए भी 20 से अधिक रैलियों की योजना बनाई है, जिसमें समराला (1 मार्च), डेरा बाबा नानक (2 मार्च) और मौड़ (8 मार्च) जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

ब्रेक: अप्रैल महीने में गेहूं की कटाई (Wheat Harvest) के कारण रैलियों पर अस्थायी रोक रहेगी।

मई: मई 2026 से रैलियां दोबारा शुरू होंगी और अगले कुछ महीनों में सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।

3. 'मजीठिया फैक्टर' और नई रणनीति

इस बार की रैलियां पहले से काफी अलग होने वाली हैं:

विक्रम मजीठिया की भूमिका: ड्रग्स और अन्य मामलों में जमानत मिलने के बाद मजीठिया इन रैलियों में मुख्य वक्ता के तौर पर नजर आएंगे। उनकी आक्रामक शैली युवाओं को जोड़ने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नया नेतृत्व: सुखबीर बादल इन रैलियों के माध्यम से पार्टी के पुराने चेहरों के साथ-साथ 'नई पीढ़ी' के स्थानीय नेताओं को भी मंच प्रदान करेंगे।

मुद्दे: अकाली दल का मुख्य निशाना सत्तारूढ़ AAP सरकार की विफलताएं (कानून व्यवस्था, बेरोजगारी) और केंद्र सरकार की पंजाब विरोधी नीतियां होंगी।

4. अकाली दल का पुनरुद्धार (Rebuilding the Base)

2022 के विधानसभा चुनावों में मात्र 3 सीटें जीतने और 2024 के लोकसभा चुनावों में केवल बठिंडा सीट बचाने के बाद, अकाली दल के लिए यह रैलियां "करो या मरो" जैसी स्थिति हैं। सुखबीर बादल का लक्ष्य पंथक वोट बैंक और किसानों को फिर से पार्टी के पाले में लाना है।