Punjab Anti-Corruption Action : सरकारी कुर्सी पर बैठकर मांग रहे थे कमीशन, विजिलेंस ने ऐसा फंसाया कि अब जेल में काटनी पड़ेगी रात

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News India Live, Digital Desk: पंजाब में भगवंत मान सरकार का 'एंटी-करप्शन' अभियान (Anti-Corruption Drive) रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आज एक और 'बड़ी मछली' विजिलेंस ब्यूरो (Vigilance Bureau) के जाल में फंस गई है। मामला बटाला (Batala) का है, जहाँ एक पीसीएस (PCS) अधिकारी और एसडीएम स्तर के अफसर को खुलेआम रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है।

गिरफ्तार किए गए अधिकारी का नाम विक्रमजीत सिंह पांथे है, जो बटाला के एसडीएम होने के साथ-साथ नगर निगम कमिश्नर का चार्ज भी संभाल रहे थे।

क्या था पूरा माजरा?
असल में, एक सरकारी ठेकेदार (अमरपाल सिंह) ने नगर निगम के लिए कुछ रिपेयरिंग और टेक्निकल काम किया था। उनका करीब 5.5 लाख रुपये का बिल पेंडिंग पड़ा था। कायदे से तो काम पूरा होने पर पैसा मिल जाना चाहिए था, लेकिन 'साहब' की फाइल पर साइन करने की कलम रुक गई थी।

आरोप है कि कमिश्नर साहब ने ठेकेदार से साफ़ कह दिया— "बिल पास कराना है तो मुझे मेरा हिस्सा दो।" उन्होंने बिल की कुल रकम का 10% (यानी करीब 50-55 हजार रुपये) रिश्वत (Bribe) के तौर पर मांगा। ठेकेदार ने थोड़ी ना-नुकर की, तो 50,000 रुपये पर सौदा तय हुआ।

विजिलेंस ने ऐसे बिछाया जाल
ठेकेदार ने चुपचाप इसकी शिकायत विजिलेंस ब्यूरो, गुरदासपुर में कर दी। विजिलेंस टीम ने पाउडर लगे नोटों के साथ ट्रैप लगाया। जैसे ही एसडीएम विक्रमजीत सिंह ने अपने ऑफिस/घर पर रिश्वत के वो 50,000 रुपये हाथ में लिए, विजिलेंस के अधिकारियों ने उन्हें वहीं दबोच लिया। उनकी जेब/हाथ से वही नोट बरामद हुए।

नोटों की गड्डियां देखकर उड़े होश
विजिलेंस की कार्रवाई सिर्फ़ 50 हजार तक नहीं रुकी। जब टीम ने उनकी गाड़ी और निजी सामान की तलाशी ली, तो वहां से 13.50 लाख रुपये और बरामद हुए। जब पूछा गया कि यह पैसा किसका है, तो एसडीएम साहब कोई जवाब नहीं दे पाए (Unaccounted Cash)।

आगे क्या होगा?
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। विजिलेंस अब यह भी जांच रही है कि क्या यह 13.5 लाख रुपये भी किसी और से रिश्वत के तौर पर लिए गए थे? बटाला शहर में इस गिरफ्तारी की चर्चा हर चाय की दुकान पर हो रही है।

यह घटना उन सभी अफसरों के लिए खतरे की घंटी है जो सोचते हैं कि उनकी टेबल के नीचे का लेन-देन किसी को पता नहीं चलेगा। पंजाब में 'तीसरी आंख' सब देख रही है!