Property Law Explained: "मैंने बेटे को घर से निकाल दिया, तो क्या पोता मेरी जमीन पर हक मांग सकता है?" जानें संपत्ति से जुड़े इस सबसे बड़े सवाल का जवाब

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Property Law Explained: “तुम मेरे घर से निकल जाओ! आज से तुम्हारा इस जायदाद पर कोई हक नहीं!”परिवारों में गुस्से में कहे गए ये शब्द, अक्सर जिंदगी भर के लिए रिश्तों में गांठ डाल देते हैं और संपत्ति के अंतहीन झगड़ों को जन्म देते हैं।

एक बहुत ही आम और उलझा हुआ सवाल है - अगर पिता ने बेटे को अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया, तो क्या उसका बेटा, यानी पोता, दादा की संपत्ति पर दावा कर सकता है?

चलिए, इस पूरे मामले को बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं, ताकि रिश्तों और पैसों के बीच का भ्रम दूर हो सके।

सबसे पहले समझें, संपत्ति दो तरह की होती है

कानून की नजर में संपत्ति का मतलब सिर्फ जमीन या मकान नहीं, बल्कि यह दो अलग-अलग तरह की होती है:

  1. खुद की कमाई हुई संपत्ति: यह वह संपत्ति है जो पिता ने अपनी नौकरी, बिजनेस या अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी है, जैसे कोई फ्लैट या दुकान।
  2. पैतृक संपत्ति (पुरखों की जायदाद): यह वह संपत्ति है जो आपके परदादा से दादा को, दादा से पिता को और पिता से आपको मिली है, और जिसका आज तक बंटवारा नहीं हुआ है।

किस संपत्ति पर किसका हक?

  • खुद की कमाई पर: पिता अपनी मेहनत से बनाई संपत्ति का 'मालिक' होता है। वह चाहे तो इसे बेच सकता है, दान कर सकता है, या अपनी वसीयत में किसी को भी दे सकता है। वह चाहे तो अपने बेटे को इससे पूरी तरह से बेदखल भी कर सकता है।
  • पैतृक संपत्ति पर: इस पर पिता  'मालिक' नहीं, सिर्फ एक 'हिस्सेदार' होता है। इस संपत्ति पर बेटे या पोते का जन्म से ही अधिकार हो जाता है। पिता इसे अपनी मनमर्जी से किसी को नहीं दे सकता।

तो अब आते हैं असली सवाल पर: पोते का क्या अधिकार है?

इसे दो स्थितियों में समझिए:

स्थिति 1: संपत्ति दादा की खुद की कमाई हुई है
 

अगर संपत्ति दादाजी ने खुद अपनी मेहनत से बनाई है, तो पोता उस पर कोई सीधा दावा नहीं कर सकता। दादा की मर्जी है कि वे उसे किसे दें। हाँ, अगर दादाजी बिना वसीयत बनाए गुजर जाते हैं, और पोते के पिता की भी मृत्यु हो चुकी है, तब पोते को अपने पिता के हिस्से की जमीन मिल सकती है।

स्थिति 2: संपत्ति पैतृक (पुरखों की) है
 

यह है सबसे महत्वपूर्ण बात!

  • पैतृक संपत्ति पर पोते का जन्म से अधिकार होता है, चाहे पिता को घर से निकाल ही क्यों न दिया गया हो।
  • लेकिन, एक पेंच है! दिल्ली हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले ने यह साफ कर दिया है कि जब तक पिता जिंदा है, तब तक पोता दादा की पैतृक संपत्ति में अपने हिस्से के लिए सीधा केस नहीं कर सकता।
  • उसे यह हक तभी मिलता है जब या तो पिता की मृत्यु हो चुकी हो, या संपत्ति का बंटवारा हो रहा हो।

तो झगड़ों से कैसे बचें?
 

संपत्ति के विवाद कोर्ट में सालों-साल चलते हैं और रिश्तों को हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं। इनसे बचने के कुछ आसान उपाय हैं:

  • खुलकर बात करें: परिवार में बैठकर शांति से बात करने से बड़े-बड़े मामले सुलझ जाते हैं।
  • समय पर वसीयत बनवाएं: खासकर अपनी खुद की कमाई हुई संपत्ति के लिए वसीयत जरूर बनवाएं, ताकि आपके बाद कोई झगड़ा न हो।
  • वकील से सलाह लें: अगर मामला उलझा हुआ लगे, तो किसी अच्छे वकील से सलाह लेने में कोई हर्ज नहीं है।

कानून सबको हक देता है, बस उसे सही तरीके से समझने की जरूरत है।