ट्रंप की वापसी के बाद भी क्यों नहीं थमा ईरान-इजरायल युद्ध? जानें वे 10 कारण जिन्होंने राष्ट्रपति की पीस थ्रू स्ट्रेंथ नीति को दी चुनौती
News India Live, Digital Desk: डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव के दौरान दावा किया था कि वह सत्ता में आते ही 24 घंटे में युद्ध रुकवा देंगे। लेकिन 20 जनवरी 2025 को शपथ लेने के बाद आज 14 मार्च 2026 तक स्थिति और भी जटिल हो गई है।
ट्रंप के युद्ध न जीत पाने के 10 मुख्य कारण
ईरान का 'परमाणु' अड़ियल रुख: ईरान अब अपने परमाणु कार्यक्रम के अंतिम चरण में है। ट्रंप के दबाव के बावजूद, तेहरान को लगता है कि परमाणु हथियार ही उनके अस्तित्व की एकमात्र गारंटी है।
इजरायल का 'टोटल विक्ट्री' संकल्प: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के शांति प्रस्तावों को यह कहकर दरकिनार कर दिया है कि जब तक हिजबुल्लाह और हमास पूरी तरह खत्म नहीं होते, इजरायल पीछे नहीं हटेगा।
रूस-चीन का बढ़ता दखल: रूस और चीन ने ईरान को कूटनीतिक और आर्थिक कवच दे रखा है। ट्रंप की पाबंदियों का असर उतना नहीं हो रहा है, क्योंकि ईरान का तेल व्यापार अब बीजिंग के जरिए सुरक्षित है।
प्रतिबंधों की विफलता: ट्रंप ने ईरान पर "मैक्सिमम प्रेशर 2.0" लागू किया है, लेकिन ईरान ने पिछले दशक में पाबंदियों के बीच जीने की आदत डाल ली है।
क्षेत्रीय गठबंधन में दरार: सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देश अब खुलकर अमेरिका के सैन्य अभियानों का हिस्सा बनने से कतरा रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने तेल ठिकानों पर हमले का डर है।
मिसाइल टेक्नोलॉजी का प्रसार: ईरान के पास अब ऐसी हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं जो इजरायल के 'आयरन डोम' को भेद सकती हैं। ट्रंप के पास इसका कोई तत्काल सैन्य समाधान नहीं है।
अमेरिका की आंतरिक स्थिति: ट्रंप प्रशासन को घरेलू स्तर पर भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी जनता एक और लंबे मध्य-पूर्व युद्ध (Middle-East War) में पैसा लगाने के खिलाफ है।
प्रॉक्सी वार की जटिलता: युद्ध केवल दो देशों के बीच नहीं है। यमन के हूती, इराक के मिलिशिया और सीरिया में सक्रिय गुटों को एक साथ टेबल पर लाना ट्रंप के लिए असंभव साबित हो रहा है।
ट्रंप की अपनी अनिश्चितता: ट्रंप कभी ईरान पर बमबारी की धमकी देते हैं तो कभी बातचीत की पेशकश करते हैं। इस विरोधाभासी संदेश (Mixed Signals) के कारण प्रतिद्वंद्वी उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान ने इस जलमार्ग को बंद करने की धमकी दी है। यदि ट्रंप ने सैन्य हमला तेज किया, तो वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो जाएगी, जिससे अमेरिका में महंगाई बेकाबू हो जाएगी।