सदन में 'प्रियंका' का प्रहार: बिना कड़वाहट के घेरा, चाणक्य वाले तंज पर हंस पड़े अमित शाह; जानें राहुल गांधी ने क्या कहा?
नई दिल्ली। संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में गुरुवार का दिन पूरी तरह से वायनाड की नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम रहा। महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे गंभीर विषयों पर बोलते हुए प्रियंका ने राजनीति के उस 'पुराने शिष्टाचार' की याद दिला दी, जो आज की ध्रुवीकृत राजनीति में दुर्लभ होता जा रहा है। अपने पहले बड़े विधायी भाषण में उन्होंने तथ्यों, इतिहास और मुस्कुराहट के साथ सत्ता पक्ष पर ऐसे तीखे हमले किए कि विपक्षी बेंचों में जोश भर गया।
दिलचस्प बात यह रही कि प्रियंका की धारदार बातों पर गृह मंत्री अमित शाह भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए और राहुल गांधी ने अपनी बहन के प्रदर्शन पर गर्व जताया।
नेहरू की विरासत से शुरुआत: 1928 का वो दस्तावेज
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत उन आरोपों के जवाब से की, जो अक्सर सत्ता पक्ष द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर लगाए जाते हैं। उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा, "हो सकता है कि आपको यह पसंद न आए, लेकिन महिलाओं के अधिकारों की नींव 1928 में ही रख दी गई थी।" उन्होंने बताया कि मोतीलाल नेहरू ने 1928 में ही महिलाओं के लिए 19 मौलिक अधिकारों की सूची तैयार की थी। प्रियंका के मुताबिक, भारतीय राजनीति में महिलाओं के समान अधिकार की सोच का बीज वहीं से अंकुरित हुआ था।
अमित शाह को बताया 'आज का चाणक्य', गृह मंत्री भी हुए लोटपोट
सदन में प्रियंका गांधी ने अपनी वाकपटुता का लोहा तब मनवाया जब उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की ओर इशारा किया। उन्होंने शाह को चुनावी राजनीति का 'चाणक्य' बताते हुए चुटकी ली। प्रियंका ने कहा कि आज की राजनीति में चतुराई बुरी बात नहीं है और अमित शाह तो इस कला में इतने माहिर हैं कि वे शायद प्राचीन चाणक्य को भी कुछ नया सिखा दें।
इस मजेदार कटाक्ष पर गृह मंत्री अमित शाह खिलखिलाकर हंस पड़े। इसका सकारात्मक असर यह हुआ कि जब शाह जवाब देने खड़े हुए, तो उनका लहजा भी प्रियंका के प्रति अपेक्षाकृत नरम रहा और उन्होंने व्यक्तिगत हमलों के बजाय मुद्दों पर बात की।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर गंभीर सवाल
मुस्कुराहटों के बीच प्रियंका ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' और परिसीमन (Delimitation) को लेकर गंभीर आशंकाएं जताईं। उनके मुख्य आरोप थे:
OBC महिलाओं की अनदेखी: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी महिलाओं के अधिकारों के साथ समझौता कर रही है।
परिसीमन का ढांचा: प्रियंका ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन आयोग की संरचना सरकार के पक्ष में झुकी हुई है।
आधी रात का नोटिफिकेशन: कांग्रेस ने उस नोटिफिकेशन को 'विचित्र' बताया जिसके जरिए कानून लागू हुआ, जबकि संशोधन पर बहस अभी जारी थी।
फ्रेम में 'नारी शक्ति' की कमी पर दिलचस्प वाकया
सदन में एक अनोखा नजारा तब दिखा जब प्रियंका महिला आरक्षण पर बोल रही थीं, लेकिन उनके आसपास केवल पुरुष सांसद ही नजर आ रहे थे। इस पर एक वरिष्ठ सांसद ने बताया कि प्रियंका को दोपहर में बोलना था, तब उनके पीछे महिला सांसद बैठी थीं। एक पुरुष सांसद ने तो मजाक में यहाँ तक कह दिया, "आपने तो आरक्षण लागू होने से पहले ही हमारी जगह ले ली।" हालांकि, बोलने का समय बदलने के कारण शाम तक महिला सांसदों की संख्या कम हो गई थी।
राहुल गांधी की सराहना और विपक्ष का जोश
भाषण खत्म होने के बाद सदन का माहौल बदला हुआ था। प्रियंका को न केवल विपक्षी नेताओं ने बधाई दी, बल्कि उनके भाई राहुल गांधी ने भी उनकी जमकर सराहना की। सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने इसे प्रियंका का एक परिपक्व और प्रभावशाली संसदीय पर्दापण माना है।
जयराम रमेश ने भी सरकार के नोटिफिकेशन पर सवाल उठाते हुए इसे 'कम्प्लीटली पजल्ड' (पूरी तरह उलझा हुआ) करार दिया। अब देखना यह है कि प्रियंका की यह नई शैली आने वाले दिनों में संसद की बहस को कितना प्रभावित करती है।