जमशेदपुर में भावुक हुईं राष्ट्रपति मुर्मू आदिवासियों के सबसे पिछड़े समूहों के लिए केंद्र सरकार ने खोली तिजोरी

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News India Live, Digital Desk: आज 30 दिसंबर 2025 को जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जमशेदपुर की सरज़मीं पर कदम रखा, तो कोल्हान का हर कोना जय-जोहार के नारों से गूँज उठा। राष्ट्रपति के लिए यह सिर्फ एक औपचारिक सरकारी यात्रा नहीं है, बल्कि अपनी उन जड़ों से जुड़ने का एक तरीका है जहाँ से उन्होंने अपना सफ़र शुरू किया था। लेकिन इस भावुक मुलाकात के पीछे एक बहुत बड़ा लक्ष्य छिपा है आदिवासियों का संपूर्ण उत्थान।

PVTG समुदाय के लिए बड़ी सौगात
अक्सर देखा गया है कि मुख्यधारा के विकास के बीच कुछ जनजातीय समूह ऐसे रह जाते हैं जिन्हें सबसे ज्यादा मदद की ज़रूरत होती है। इन्हें PVTG (Particularly Vulnerable Tribal Groups) कहा जाता है। राष्ट्रपति का इस बार विशेष जोर इन्हीं 'सबसे पिछड़ों में भी सबसे पिछड़े' समूहों पर है। जमशेदपुर में बातचीत के दौरान इस बात पर मुहर लगी कि आने वाले बजट में इनके स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास के लिए किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।

सीधे खाते में पहुँचेगा मदद का पैसा
योजना यह है कि इन समुदायों तक मदद पहुँचाने के लिए बिचौलियों का रास्ता खत्म कर दिया जाए। राष्ट्रपति मुर्मू ने हमेशा इस बात की पैरवी की है कि विकास के लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचें। सरकार ने इसके लिए जनमन (PM-JANMAN) जैसी योजनाओं के दायरे को और बढ़ाते हुए बजट का एक बड़ा हिस्सा झारखंड जैसे जनजातीय बहुल राज्यों के लिए तय किया है।

जमीनी स्तर पर बदलाव की कोशिश
सिर्फ ऊँची बातें ही नहीं, बल्कि गाँव-गाँव तक पक्की सड़कों, बिजली और सबसे ज़रूरी 'शुद्ध पेयजल' पहुँचाने का खाका खींचा गया है। जमशेदपुर की इस यात्रा में राष्ट्रपति ने कुछ स्वयं सहायता समूहों (SHG) से भी मुलाकात की, जिससे यह साफ़ हो गया कि अब आदिवासी महिलाएं केवल घरों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उद्यमी (Entrepreneur) बनकर आर्थिक रूप से मज़बूत होंगी।

एक उज्जवल भविष्य की उम्मीद
आज का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि 2026 आने वाला है, और साल के इस आखिरी पड़ाव पर राष्ट्रपति का झारखंड आना यह संदेश देता है कि राज्य का जनजातीय समाज देश की मुख्य विकास की कहानी का सबसे ज़रूरी पन्ना है। आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके जल, जंगल, जमीन के सम्मान के साथ उन्हें आधुनिक सुविधाएं देना ही इस यात्रा का असली मक़सद है।

जमशेदपुर की यह चमक आने वाले दिनों में झारखंड के हर आदिवासी गांव तक पहुँचेगी, इसी उम्मीद के साथ यह यात्रा समाप्त हुई।