बोइंग-एयरबस का एकाधिकार तोड़ने की तैयारी, रूस के साथ मिलकर भारत बनाएगा अपना पैसेंजर जेट
News India Live, Digital Desk: दशकों से जब भी हम हवाई जहाज में सफर करने की सोचते हैं, तो दो ही नाम दिमाग में आते हैं - अमेरिका का बोइंग (Boeing) और यूरोप का एयरबस (Airbus)। इन दोनों कंपनियों ने दुनिया के एविएशन बाजार पर एकछत्र राज किया है। लेकिन अब, इस तस्वीर को बदलने के लिए भारत ने एक बहुत बड़ा और साहसिक कदम उठाने की तैयारी कर ली है।
सरकारी एयरोस्पेस कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), रूस के साथ मिलकर भारत में ही एक पैसेंजर जेट का निर्माण करने की योजना बना रही है। यह विमान है रूस का सुखोई सुपरजेट-100 (SJ-100), जिसे अब 'मेड इन इंडिया' बनाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। अगर यह डील सफल होती है, तो यह भारतीय एविएशन के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी।
क्या है SJ-100 और क्यों है यह खास?
सुखोई सुपरजेट-100 एक क्षेत्रीय जेट है, यानी यह छोटी और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए बनाया गया है। इसमें लगभग 100 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है, जो भारत के घरेलू रूट के लिए बिल्कुल परफेक्ट है।
इसकी सबसे खास बात यह है कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस ने इसे बिना किसी पश्चिमी कल-पुर्जे के बनाया है। यानी, यह विमान पूरी तरह से रूसी तकनीक पर आधारित है। अब इसी तकनीक को भारत लाकर, इसे भारतीय आसमान के लिए तैयार करने की योजना है।
भारत के लिए यह डील क्यों है गेम-चेंजर?
यह सिर्फ एक विमान बनाने की बात नहीं है, इसके मायने कहीं ज़्यादा गहरे हैं:
- 'आत्मनिर्भर भारत' को पंख: यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को नई ऊंचाई देगा। भारत पहली बार कमर्शियल पैसेंजर जेट के निर्माण के क्षेत्र में उतरेगा।
- बोइंग-एयरबस पर निर्भरता खत्म: अभी तक भारत की सभी एयरलाइंस यात्री विमानों के लिए पूरी तरह से बोइंग और एयरबस पर निर्भर हैं। अपना विमान होने से यह निर्भरता कम होगी और देश का पैसा देश में ही रहेगा।
- बढ़ते बाजार की ज़रूरतें पूरी होंगी: भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ एविएशन मार्केट है। यहां हर साल सैकड़ों नए विमानों की ज़रूरत पड़ती है। भारत में बना विमान इन जरूरतों को पूरा कर सकता है।
- नई नौकरियां और तकनीकी विकास: इस प्रोजेक्ट से देश में हजारों नई नौकरियां पैदा होंगी और भारत को एडवांस्ड एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी हासिल होगी।
भारत-रूस की दोस्ती का नया अध्याय
भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में दशकों पुरानी और भरोसेमंद साझेदारी रही है। सुखोई लड़ाकू विमानों से लेकर ब्रह्मोस मिसाइल तक, दोनों देशों ने मिलकर कई सफलताएं हासिल की हैं। अब यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र से निकलकर नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने जा रही है।
राह में चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि यह सपना बहुत बड़ा और सुनहरा है, लेकिन इसकी राह आसान नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती होगी इस विमान के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानक सर्टिफिकेट हासिल करना, ताकि यह दुनिया के दूसरे देशों में भी उड़ सके। इसके अलावा, बोइंग और एयरबस जैसे स्थापित दिग्गजों के सामने अपनी जगह बनाना भी एक मुश्किल काम होगा।
लेकिन, HAL का यह कदम भारत की उस महत्वाकांक्षा को दिखाता है कि अब वह सिर्फ टेक्नोलॉजी का खरीदार नहीं, बल्कि एक निर्माता बनना चाहता है। अगर यह मिशन सफल रहा, तो जल्द ही हम और आप गर्व से कह सकेंगे - “हमारा आसमान, हमारा विमान