छत्तीसगढ़ की सियासत गरमाई शोषण के खिलाफ लड़ाई का समर्थन, लेकिन हिंसा का नहीं दिग्विजय सिंह ने नक्सलवाद पर अपनी स्थिति की स्पष्ट
News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि नक्सलवाद की जड़ें शोषण और अन्याय में छिपी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए आदिवासियों के संघर्ष (Exploitation) के साथ खड़े हैं, लेकिन इस लड़ाई में अपनाए जाने वाले हिंसा के रास्ते के वे सख्त खिलाफ हैं।
1. दिग्विजय सिंह के बयान के 3 मुख्य बिंदु
हिंसा बनाम विचार: सिंह ने कहा, "मेरा मानना है कि किसी भी विचारधारा की आड़ में निर्दोष लोगों की हत्या या सुरक्षाबलों पर हमला करना गलत है। हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकती।"
मूल कारण पर प्रहार: उन्होंने तर्क दिया कि जब तक आदिवासियों का शोषण बंद नहीं होगा और उन्हें उनके हक नहीं मिलेंगे, तब तक इस समस्या का वैचारिक समाधान ढूंढना मुश्किल होगा। [1.2]
संवाद की वकालत: वे हमेशा से ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केवल सैन्य कार्रवाई के बजाय 'सॉफ्ट पावर' और 'संवाद' के जरिए समाधान निकालने के पक्षधर रहे हैं।
2. छत्तीसगढ़ की राजनीति में क्यों मचा बवाल?
छत्तीसगढ़ में वर्तमान सरकार नक्सलियों के खिलाफ 'सर्जिकल स्ट्राइक' और 'ऑपरेशन क्लीन' जैसे कड़े अभियान चला रही है। ऐसे में दिग्विजय सिंह का यह बयान विपक्ष (BJP) के लिए एक बड़ा हथियार बन गया है।
BJP का हमला: बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के नेताओं की भाषा नक्सलियों का मनोबल बढ़ाने वाली है।
कांग्रेस का बचाव: छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह दिग्विजय सिंह के निजी विचार हो सकते हैं, लेकिन पार्टी पूरी तरह से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। [2.4]
3. 'लाल आतंक' के खिलाफ सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई
पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ के बस्तर और सुकमा क्षेत्रों में सुरक्षाबलों ने कई बड़े एनकाउंटर किए हैं:
रिकॉर्ड गिरफ्तारियां: 2026 की शुरुआत से अब तक 100 से अधिक सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
विकास योजनाएं: सरकार इन क्षेत्रों में सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से विश्वास बहाली की कोशिश कर रही है। [3.5]
4. विचारधारा और राजनीति का टकराव
दिग्विजय सिंह पहले भी कई विवादित मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते रहे हैं। जानकारों का मानना है कि उनका यह बयान आदिवासियों के बीच कांग्रेस की 'हितैषी' छवि को मजबूत करने की कोशिश है, लेकिन शहरी मतदाताओं के बीच इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है।
| मुद्दा | दिग्विजय सिंह का स्टैंड | सरकार/BJP का स्टैंड |
|---|---|---|
| नक्सलवाद | सामाजिक-आर्थिक समस्या | देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा |
| समाधान | संवाद और हक देना | पुलिस कार्रवाई और उन्मूलन |
| हिंसा | पूरी तरह विरोध | बर्दाश्त नहीं (Zero Tolerance) |