सियासी हलचल या बहुत बड़ी गलती? ट्रंप और नेतनयाहू पर पाकिस्तानी मंत्री की टिप्पणी ने खड़ा किया विवाद
News India Live, Digital Desk : अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शब्दों का बड़ा खेल होता है। एक छोटा सा शब्द भी देशों के बीच संबंधों को बना सकता है या फिर तनाव पैदा कर सकता है। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कुछ ऐसा ही किया है। उनके एक ताज़ा बयान ने दुनिया भर में सुर्खियाँ बटोर ली हैं। मामला सिर्फ तीखी बयानबाजी तक नहीं रहा, बल्कि इसमें सीधे-सीधे इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ज़िक्र है।
आखिर ये पूरा मामला है क्या?
एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री (ख्वाजा आसिफ) की जुबान से कुछ ऐसे शब्द निकले जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया। उन्होंने इज़रायल और गाज़ा के हालातों पर अपनी बात रखते हुए यह तक कह दिया कि नेतनयाहू को "अगवा" किया जाना चाहिए। बात यहीं नहीं रुकी, उन्होंने अमेरिका के प्रभावशाली नेता डोनाल्ड ट्रंप को 'सज़ा' दिलाने का संकेत भी दे दिया।
भावुकता या सोची-समझी राजनीति?
आम तौर पर पाकिस्तान में फिलिस्तीन और इज़रायल का मुद्दा बहुत संवेदनशील होता है और लोग बहुत भावुक होते हैं। लेकिन जब एक ज़िम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति किसी दूसरे देश के राष्ट्रप्रमुख के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करता है, तो यह कूटनीतिक (Diplomatic) मर्यादाओं के खिलाफ माना जाता है। जानकार कह रहे हैं कि शायद यह घरेलू राजनीति में वाहवाही लूटने की कोशिश है, लेकिन इसके अंतरराष्ट्रीय नतीजे भारी हो सकते हैं।
ट्रंप का ज़िक्र और पाकिस्तान की मुश्किलें
ट्रंप को सज़ा देने या उनके खिलाफ बात करना पाकिस्तान के लिए खुद 'आ बैल मुझे मार' जैसा साबित हो सकता है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि डोनाल्ड ट्रंप का मिजाज़ और उनकी नीतियां किस कदर आक्रामक रही हैं। अगर अमेरिका इसे गंभीरता से लेता है, तो पाकिस्तान की पहले से खराब आर्थिक और रणनीतिक स्थिति और बिगड़ सकती है।
सोशल मीडिया और दुनिया का रुख
जैसे ही यह खबर बाहर आई, इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। जहाँ कुछ लोग इसे मज़बूत स्टैंड कह रहे हैं, वहीं विशेषज्ञों का बड़ा हिस्सा इसे 'अपरिपक्व बयानबाज़ी' करार दे रहा है। इज़रायल की तरफ से भले ही तुरंत कोई आधिकारिक जवाब न आया हो, लेकिन खुफिया और रणनीतिक हलकों में इसकी गूँज साफ सुनाई दे रही है।
आगे क्या होगा?
ऐसे बयानों से अक्सर देश को बचाव की स्थिति में आना पड़ता है। अब देखना यह है कि क्या पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय इस पर कोई सफाई जारी करता है या फिर बात को शांत करने की कोशिश करता है। क्योंकि एक तरफ कश्मीर मुद्दा है और दूसरी तरफ पश्चिम के देशों से रिश्ते ऐसे में इतने भारी-भरकम शब्दों का बोझ संभालना आसान नहीं होगा।