सत्ता, इतिहास और एक तीखा तंज ,ईरान और ट्रंप के बीच जुबानी जंग में नया मोड़
News India Live, Digital Desk: दुनिया भर की राजनीति में इन दिनों कड़वाहट तो बहुत है, लेकिन जब ये बहस राजनीतिक गलियारों से निकलकर सीधे इतिहास और धर्म के पन्नों तक पहुँच जाए, तो समझ लेना चाहिए कि मामला काफी गहरा है। अभी हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमैनी ने कुछ ऐसा ही किया है। उन्होंने सीधे अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए इतिहास के कुछ सबसे विवादित नामों का ज़िक्र कर दिया।
किस्सा क्या है?
अक्सर हमने देखा है कि दो देशों के नेता एक-दूसरे की नीतियों की बुराई करते हैं। लेकिन खमैनी ने ट्रंप को चेतावनी देने के लिए 'फिरौन' और 'नमरूद' का उदाहरण दिया। अगर आपने पुरानी कहानियाँ या इतिहास पढ़ा है, तो आप जानते होंगे कि ये नाम बेहद ताकतवर लेकिन घमंडी शासकों के तौर पर दर्ज हैं, जिनका अंत काफी बुरा हुआ था। खमैनी का इशारा साफ था—ताकत कितनी भी ज़्यादा क्यों न हो, अगर वो 'अन्याय' पर टिकी है, तो उसका ढहना तय है।
खमैनी ने ट्रंप को ही क्यों चुना?
ये बात छिपी नहीं है कि ईरान और ट्रंप के बीच पुरानी रंजिश है। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान लगाई गई आर्थिक पाबंदियां और तनाव आज भी ईरान की यादों में ताज़ा है। अब जब ट्रंप एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं, तो ईरान ने शायद ये महसूस किया कि सीधी कूटनीति की बजाय इस तरह के 'मानसिक और वैचारिक हमलों' से दबाव बनाया जाए।
ऐतिहासिक संदर्भ का असर
फिरौन (Pharaoh) और नमरूद (Nimrod) के उदाहरण देना सिर्फ डराने के लिए नहीं होता। खमैनी अपने समर्थकों और मुस्लिम दुनिया को ये जताना चाहते हैं कि उनके लिए अमेरिका सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि एक ऐसी ताकत है जिससे लड़ना उनका धार्मिक और नैतिक कर्तव्य है। ट्रंप के व्यक्तित्व और उनकी आक्रामक विदेश नीति को खमैनी ने 'तानाशाही' और 'अहंकार' का नया रूप करार दिया है।
अब आगे क्या होने वाला है?
सवाल उठता है कि क्या इन भारी-भरकम शब्दों से हकीकत में कोई बदलाव आएगा? डोनाल्ड ट्रंप, जो खुद अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते हैं, शायद इस तंज का जवाब भी अपने अंदाज़ में दें। लेकिन फिलहाल, खमैनी के इस बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ये जंग सिर्फ बॉर्डर पर ही नहीं, बल्कि शब्दों और मिसालों के ज़रिए भी लड़ी जा रही है।
अब देखना ये होगा कि अमेरिका के इस नए अध्याय में ईरान और अमेरिका के ये कड़वे रिश्ते सुधार की तरफ जाते हैं या तकरार और बढ़ने वाली है।