PM Modi's visit to Namibia: क्यों है इतना महत्वपूर्ण और कैसे भारत ने हमेशा दिया है नामीबिया का साथ?
News India Live, Digital Desk: PM Modi's visit to Namibia: हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और ग्रीस की यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश यात्रा के अंतिम पड़ाव के रूप में नामीबिया का भी दौरा किया। भले ही इस लेख के प्रकाशन के समय वह नामीबिया में न हों (क्योंकि खबर पुरानी है), यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि नामीबिया भारत के लिए अफ्रीकी महाद्वीप में एक प्रमुख सहयोगी रहा है। यह दौरा न सिर्फ भविष्य के संबंधों को मजबूत करने वाला था, बल्कि अतीत में भारत द्वारा नामीबिया को दी गई महत्वपूर्ण मदद की याद भी दिलाता है।
नामीबिया का स्वतंत्रता संग्राम और भारत का सहयोग:
नामीबिया एक ऐसा अफ्रीकी देश है, जिसने रंगभेद के शासन (दक्षिण अफ्रीका) और अवैध कब्जे के खिलाफ एक लंबा और कठिन संघर्ष लड़ा था। 1990 में नामीबिया को स्वतंत्रता मिली थी। इस पूरे संघर्ष के दौरान, भारत ने नामीबिया का लगातार साथ दिया।
अंतर्राष्ट्रीय समर्थन: भारत उन शुरुआती देशों में से था जिसने नामीबिया के स्वतंत्रता संग्राम को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पुरज़ोर तरीके से उठाया।
SWAPO का साथ: भारत ने 'साउथ वेस्ट अफ्रीकन पीपल्स ऑर्गेनाइजेशन' (SWAPO) का खुला समर्थन किया, जो नामीबिया की मुक्ति आंदोलन की अग्रणी ताकत थी। भारत ने SWAPO के नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक, नैतिक और कुछ हद तक सामग्री संबंधी सहायता भी दी।
संयुक्त राष्ट्र में भूमिका: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी नामीबिया की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसे एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दिलाने के लिए लगातार वकालत की।
आधुनिक संबंध और आगे का रास्ता:
आज भी भारत और नामीबिया के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं। यह यात्रा इन संबंधों को और मजबूत करने का अवसर थी।
व्यापार और निवेश: दोनों देश व्यापार, निवेश, ऊर्जा (विशेषकर यूरेनियम, जिसे भारत अपनी परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए नामीबिया से प्राप्त कर सकता है), खनन और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
क्षमता निर्माण: भारत ने नामीबिया में क्षमता निर्माण, शिक्षा और तकनीकी सहायता प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें आईटेक (ITEC) जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय मंच: दोनों देश कई वैश्विक मुद्दों पर समान विचार साझा करते हैं और संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य बहुपक्षीय मंचों पर एक दूसरे का समर्थन करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का नामीबिया में रहना (या उस दौरान हुई यात्रा) भारत की 'अफ्रीका को प्राथमिकता' (Africa First Policy) नीति का एक हिस्सा था। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत केवल आर्थिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक मित्रता और साझा मूल्यों के आधार पर अफ्रीकी देशों के साथ गहरे रिश्ते बनाना चाहता है। यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने और साझा विकास की राह पर आगे बढ़ने का एक अवसर था।