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March 26 2026 12:39 am

पीएम मोदी का लोकसभा में बड़ा बयान पश्चिम एशिया के हालातों पर जताई चिंता, युद्ध के बीच दुनिया को दिया शांति का संदेश

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News India Live, Digital Desk: संसद के बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लोकसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते तनाव पर भारत का रुख स्पष्ट किया। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों और वैश्विक अस्थिरता पर चिंता व्यक्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत हमेशा से ही शांति और संवाद का पक्षधर रहा है। प्रधानमंत्री का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व के हालातों पर टिकी हैं और भारत की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में दोटूक शब्दों में कहा कि युद्ध से कभी किसी का भला नहीं होता, बल्कि यह मानवता के लिए संकट पैदा करता है। उन्होंने ईरान और इजरायल (Iran-Israel Conflict) के बीच चल रही तनातनी का जिक्र करते हुए कहा कि संघर्ष के इस दौर में कूटनीति और बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। पीएम ने सदन को आश्वस्त किया कि भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रियता से शांति बहाली के प्रयास कर रही है। उनके इस बयान को वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती 'सॉफ्ट पावर' और शांतिदूत की भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर असर

संसद में चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने न केवल कूटनीतिक पहलुओं पर बात की, बल्कि पश्चिम एशिया में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार वहां के हालातों पर पल-पल की नजर रख रखी है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। इसके साथ ही, युद्ध के कारण वैश्विक तेल कीमतों (Oil Prices) और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सरकार सतर्क है। बजट सत्र में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था इन वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।

वैश्विक मंच पर भारत की तटस्थता और प्रभाव

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति 'स्वतंत्र' और 'राष्ट्रहित' सर्वोपरि के सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने अमेरिका (USA) और अन्य देशों के साथ भारत के मजबूत संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि हम सभी पक्षों के साथ संपर्क में हैं ताकि तनाव को कम किया जा सके। पीएम मोदी के इस भाषण ने यह संकेत दे दिया है कि भारत अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक संकटों को सुलझाने में एक निर्णायक भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है। विपक्षी दलों ने भी विदेश नीति के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए, लेकिन प्रधानमंत्री ने उन्हें आंकड़ों और तर्कों के साथ शांत किया।