PM मोदी आसियान समिट में वर्चुअली होंगे शामिल, मलेशिया का दौरा रद्द ,ट्रंप से मुलाकात पर सस्पेंस
News India Live, Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी आसियान (ASEAN) समिट में व्यक्तिगत रूप से भाग नहीं लेंगे, उन्होंने मलेशिया के अपने नियोजित दौरे को रद्द कर दिया है। भारतीय प्रधानमंत्री वर्चुअली इस समिट में शामिल होंगे, जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर व्यक्तिगत रूप से भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह फैसला कुछ मुख्य कारणों से लिया गया है, जिसमें बिहार में आगामी चुनाव की तैयारियां और छठ पूजा का उत्सव शामिल है, जो इसी दौरान पड़ रहे हैं।
ट्रंप से मुलाकात का सवाल और Trade Deal पर अनिश्चितता
यह समिट इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी क्योंकि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री मोदी की एक संभावित व्यक्तिगत मुलाकात का मंच बन सकती थी। दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव (Trade Tensions) चरम पर है, जिसमें अमेरिकी टैरिफ और रूस से भारत के तेल आयात जैसे मुद्दे शामिल हैं। माना जा रहा था कि इस समिट के दौरान भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कोई बड़ी घोषणा हो सकती थी। लेकिन, भारत सरकार की ओर से अब तक इस तरह की किसी डील की कोई निश्चित खबर नहीं आई है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है[।
भारत सरकार का पक्ष
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित किया है कि वह दीपावली की छुट्टियों और छठ पूजा के कारण वर्चुअली जुड़ेंगे। उन्होंने कहा कि भारत मलेशिया का एक महत्वपूर्ण भागीदार है और दोनों देश व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे।
विपक्ष का निशाना
प्रधानमंत्री मोदी के इस फैसले पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कटाक्ष किया कि मोदी शायद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शारीरिक रूप से दिखना जोखिम भरा मानते होंगे।
क्या है वजह?
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, समय का टकराव (Scheduling conflict) ही मुख्य वजह है। हालांकि, इस बात की भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड टॉक में कोई बड़ी सफलता न मिलना भी एक कारण हो सकता है। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ और भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना जारी रखने जैसे मुद्दे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर रहे हैं
ऐसे में, प्रधानमंत्री मोदी का वर्चुअल रूप से भाग लेना और विदेश मंत्री का प्रतिनिधित्व करना एक रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। यह न केवल भारत की घरेलू प्राथमिकताओं को दर्शाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक संतुलन साधने का भी प्रयास है।