Pitru Moksha Amavasya 2025: तिथि, संतान प्राप्ति और धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति के उपाय
- by Archana
- 2025-08-18 12:57:00
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है और भाद्रपद मास की अमावस्या को पितृमोक्ष अमावस्या या कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. यह तिथि न केवल पितरों के तर्पण के लिए शुभ मानी जाती है, बल्कि संतान प्राप्ति और धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति के लिए भी इसका बड़ा महत्व है. साल 2025 में पितृमोक्ष अमावस्या रविवार, 24 अगस्त को मनाई जाएगी. अमावस्या तिथि 23 अगस्त 2025 को सुबह 11 बजकर 47 मिनट पर प्रारंभ होकर 24 अगस्त 2025 को दोपहर 01 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी, लेकिन उदया तिथि के कारण व्रत 24 अगस्त को रखा जाएगा.
इस दिन को पिठोरी अमावस्या भी कहते हैं, जिसका व्रत मुख्यतः माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं. मान्यता है कि इस दिन 64 योगिनियों और माता दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कुंवारी लड़कियों को सुयोग्य वर प्राप्त होता है. इसके अतिरिक्त, यह व्रत संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए भी अत्यधिक शुभ माना जाता है और आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने में भी सहायक है.
मनोकामना पूर्ति और धन समस्या निवारण के उपाय:
वट वृक्ष की पूजा: अमावस्या के दिन वट वृक्ष (बरगद का पेड़) की पूजा और परिक्रमा का विशेष महत्व है. सूर्योदय के बाद स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें. वट वृक्ष को जल अर्पित करें और उसकी पूजा करें. शाम को सूर्यास्त के समय वट वृक्ष के नीचे दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से सभी तरह की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
भगवान विष्णु और लक्ष्मी का आशीर्वाद: इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव-पार्वती की विशेष पूजा करनी चाहिए. पूजा के दौरान इन्हें नए वस्त्र अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
ब्राह्मण को भोजन और दान: अमावस्या पर ब्राह्मणों को भोजन कराना और अपनी क्षमता अनुसार अनाज, कपड़े और धन का दान करना पुण्यकारी होता है. ब्राह्मणों को मीठे पकवान, विशेषकर पूड़ी-हलवा का प्रसाद खिलाने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
पितृ तर्पण: यह अमावस्या पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए भी उत्तम मानी जाती है. पितरों की आत्मा की शांति के लिए जल तर्पण करना चाहिए, जिससे वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.
काले तिल का दान: कुंडली में राहु-केतु दोष को शांत करने और शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन जल में काले तिल मिलाकर तर्पण करना और तिल का दान करना लाभकारी होता है.
शंखनाद और दीपक: सूर्यास्त के बाद घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाकर भगवान की आरती करें. पूजा के दौरान शंख बजाना और गंगाजल का छिड़काव करना नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर घर में सकारात्मकता लाता है.
पितृमोक्ष अमावस्या का यह पावन दिन न केवल पितरों का आशीर्वाद पाने का अवसर है, बल्कि स्वयं के जीवन की बाधाओं को दूर कर सुख और समृद्धि प्राप्त करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है.
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