PDA केवल चुनावी ढकोसला, सपा का असली चेहरा दलित विरोधी मायावती ने गेस्ट हाउस कांड याद दिलाकर अखिलेश को घेरा

Post

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही जुबानी जंग तेज हो गई है। बसपा प्रमुख मायावती ने अखिलेश यादव के 'PDA' नारे को एक राजनीतिक पैंतरा (Political Gimmick) करार दिया है। मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए सपा पर हमला करते हुए कहा कि जो पार्टी दलितों के सम्मान के साथ खिलवाड़ कर चुकी है, वह आज उनके हित की बात करके जनता को गुमराह कर रही है।

मायावती के हमले के 3 बड़े बिंदु

1. PDA को बताया चुनावी हथकंडा

मायावती ने कहा कि सपा का 'PDA' (P-पिछड़ा, D-दलित, A-अल्पसंख्यक) नारा केवल वोटों के ध्रुवीकरण के लिए बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान हमेशा दलितों और पिछड़ों का शोषण हुआ है और अब चुनाव आते ही उन्हें लुभाने की कोशिश की जा रही है।

2. गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाई

मायावती ने एक बार फिर 2 जून 1995 के कुख्यात 'गेस्ट हाउस कांड' का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दिन सपा के गुंडों ने एक दलित की बेटी (स्वयं मायावती) की जान लेने की कोशिश की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जो पार्टी महिला और दलित विरोधी मानसिकता रखती है, वह दलितों का भला कैसे कर सकती है?

3. सपा सरकार के 'दलित विरोधी' फैसले

मायावती ने उन फैसलों की भी याद दिलाई जब सपा सरकार ने कथित तौर पर दलितों के हक पर कैंची चलाई थी:

एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट को कमजोर करने की कोशिश।

पदोन्नति में आरक्षण (Reservation in Promotion) का विरोध करना।

दलित महापुरुषों के नाम पर रखे गए जिलों और संस्थानों के नाम बदलना।

क्यों अहम है यह बयान? (Political Significance)

उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिलहाल 'दलित वोट बैंक' को लेकर होड़ मची है। जहाँ एक ओर अखिलेश यादव अपने 'PDA' के जरिए गैर-यादव पिछड़ों और दलितों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं मायावती अपने कैडर वोट को खिसकने से बचाने के लिए सपा की पुरानी छवि को जनता के सामने रख रही हैं।

मुद्दामायावती का पक्षअखिलेश का पक्ष (PDA)
दलित सुरक्षासपा सरकार में असुरक्षित थे।PDA के जरिए सबको साथ लाएंगे।
आरक्षणसपा ने पदोन्नति में आरक्षण फाड़ा।सामाजिक न्याय के लिए आरक्षण जरूरी।
अल्पसंख्यकसपा ने केवल डराकर वोट लिया।सपा ही अल्पसंख्यकों की असली रक्षक।

सपा की प्रतिक्रिया

सपा के प्रवक्ताओं का कहना है कि मायावती बीजेपी (BJP) की 'बी-टीम' की तरह काम कर रही हैं और बीजेपी को फायदा पहुँचाने के लिए पुराने मुर्दे उखाड़ रही हैं। उनका दावा है कि PDA के बढ़ते प्रभाव से बसपा और बीजेपी दोनों घबराए हुए हैं।