बंगाल में नोटिस की दहशत आखिर क्या लिखा था उस चिट्ठी में कि थम गईं तीन जिंदगी? चुनाव आयोग तक पहुंची आंच
News India Live, Digital Desk: आज के दौर में जब हम डिजिटल इंडिया की बात करते हैं, तब सरकारी सिस्टम से आया एक छोटा सा कागज़ भी किसी की जान ले सकता है सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन पश्चिम बंगाल से आई एक खबर ने इस हकीकत को सबके सामने ला दिया है। यहाँ एक सरकारी नोटिस के तनाव में आकर तीन बुजुर्गों की जान चली गई। यह खबर सिर्फ़ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि उस डर की कहानी है जो अक्सर कागजी कार्यवाहियों के नाम पर आम लोगों के दिलों में बैठ जाता है।
पूरा मामला क्या है?
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के 'सिरी' इलाके में रहने वाले कुछ बुजुर्गों को हाल ही में कुछ सरकारी नोटिस मिले। ये नोटिस चुनाव आयोग या नागरिकता/वोटर पहचान से जुड़ी किसी प्रक्रिया के बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि इन नोटिसों को देखते ही इलाके में हड़कंप मच गया। जो बुजुर्ग अपनी उम्र की आखिरी दहलीज़ पर थे, वे इस डर को झेल नहीं पाए कि शायद उनके अस्तित्व पर ही कोई खतरा मंडरा रहा है। इसी मानसिक दबाव और सदमे की वजह से तीन बुजुर्गों की मौत हो गई।
CEC ज्ञानेश कुमार तक पहुंची आंच
यह मामला सिर्फ दु:ख तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें कानूनी पेंच भी फंस गया है। इन मौतों से गुस्साए लोगों और कार्यकर्ताओं ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन की इस तरह की 'असंवेदनशील' कार्यवाहियों की वजह से गरीब और मासूम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति को सही जानकारी और मानसिक रूप से तैयार न किया जाए, इस तरह के नोटिस भेजना लोगों को मौत के मुँह में धकेलने जैसा है।
कागज़ों का डर और आम आदमी
ये पहली बार नहीं है जब बंगाल में इस तरह की हलचल हुई हो। चाहे वो पहचान पत्र का मामला हो या चुनावी रोल में सुधार की प्रक्रिया, बंगाल की राजनीति में ये मुद्दे हमेशा से संवेदनशील रहे हैं। खासकर सीमावर्ती या पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोग सरकारी चिट्ठियों से घबरा जाते हैं। उन्हें लगता है कि एक छोटी सी गलती उन्हें उनकी अपनी ही ज़मीन से बेदखल न कर दे। यह मौतें हमें याद दिलाती हैं कि प्रशासनिक कार्यों में मानवीय संवेदना का होना कितना जरूरी है।
क्या प्रशासन जिम्मेदारी लेगा?
सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक, अब हर कोई यही पूछ रहा है—'उन तीन मौतों का जिम्मेदार कौन है?' क्या चुनाव आयोग अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करेगा? पुलिस में दी गई शिकायत का भविष्य क्या होगा, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन एक बात तय है कि इस घटना ने चुनावी मशीनरी पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।