Panchayat polls 2025 : राजस्थान में टले पंचायत चुनाव, सुप्रीम कोर्ट का ट्रिपल टेस्ट बना बड़ी वजह

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News India Live, Digital Desk: Panchayat polls 2025 : राजस्थान में होने वाले पंचायत चुनावों को फिलहाल रोक दिया गया है. इसके पीछे एक बड़ी वजह है – अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने का सुप्रीम कोर्ट का एक अहम आदेश. राजस्थान ओबीसी आयोग ने यह फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग से कह दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के तय 'ट्रिपल टेस्ट' (Triple Test) को पूरा किए बिना ओबीसी आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता. इसका मतलब यह है कि जब तक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जाता, तब तक चुनाव आगे नहीं बढ़ेंगे.

क्या है ये सुप्रीम कोर्ट का 'ट्रिपल टेस्ट'?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि स्थानीय निकाय (जैसे पंचायत और नगर पालिका) चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए राज्य सरकारों को तीन शर्तें पूरी करनी होंगी:

  1. डाटा इकट्ठा करना (Empirical Data Collection): सबसे पहले, राज्य को एक समर्पित आयोग बनाना होगा जो ओबीसी समुदायों के पिछड़ेपन से जुड़ा सारा ठोस डेटा (आंकड़े) इकट्ठा करेगा. इससे पता चलेगा कि असल में किस इलाके में कितने आरक्षण की ज़रूरत है.
  2. समर्पित आयोग (Dedicated Commission): दूसरा, यह सुनिश्चित करना होगा कि एक खास आयोग हो जो ओबीसी आरक्षण की ज़रूरतों और इसे लागू करने के तरीकों पर काम करे.
  3. 50% की सीमा (50% Ceiling): तीसरा और सबसे अहम, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और ओबीसी (OBC) को मिलाकर कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होना चाहिए.

राजस्थान ओबीसी आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि अभी राज्य में इन शर्तों को पूरा नहीं किया गया है, और जब तक यह ट्रिपल टेस्ट पूरा नहीं हो जाता, तब तक ओबीसी के लिए कोई आरक्षण नहीं दिया जा सकता और इस कारण चुनाव स्थगित किए जा रहे हैं. आयोग ने यहां तक कहा है कि तीन महीने में राज्य सरकार को ओबीसी आरक्षण की अनुशंसाएं सौंपी जाएंगी

राजस्थान की राजनीति पर असर

यह फैसला निश्चित तौर पर राजस्थान की राजनीति में हलचल मचाएगा, क्योंकि लंबे समय से पंचायत चुनावों को लेकर कई तरह की अटकलें चल रही थीं. कई राजनीतिक पार्टियां लगातार चुनावों की मांग कर रही थीं यह मामला सरकार के लिए भी एक चुनौती बन गया है, जिसे अब जल्द से जल्द 'ट्रिपल टेस्ट' की प्रक्रिया को पूरा करना होगा ताकि लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाइयों, पंचायतों में चुनाव हो सकें.

अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह कैसे इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करती है ताकि ओबीसी समुदायों को संवैधानिक रूप से वैध आरक्षण मिल सके और चुनाव कराए जा सकें.