पाकिस्तान का ध्यान भटका या पासा पलटा? समझिए ईरान से चल रही इस खींचतान का सीधा संबंध कश्मीर की शांति से

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News India Live, Digital Desk: हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय खबरों में अगर किसी बात की सबसे ज्यादा चर्चा है, तो वो है ईरान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव। एक समय पर पड़ोसी और नाम के लिए ही सही पर 'दोस्त' कहे जाने वाले इन दो देशों के बीच जिस तरह से मिसाइलें चली हैं, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। लेकिन यहाँ एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या पाकिस्तान की इन मुश्किलों से भारत, और खासकर कश्मीर की स्थिति पर कोई फर्क पड़ेगा?

असली झगड़ा है क्या?
इसे समझने के लिए हमें कोई बहुत बड़ा एक्सपर्ट बनने की ज़रूरत नहीं है। सीधी सी बात ये है कि पाकिस्तान लंबे समय से अपने ही देश में उग्रवाद और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। वहीं ईरान, जो खुद को शिया मुस्लिम जगत का अगुवा मानता है, वो अपनी सीमा पर होने वाली आतंकी गतिविधियों से परेशान था। जब सब्र का बांध टूटा, तो ईरान ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर उन अड्डों को निशाना बनाया जो उनकी सुरक्षा के लिए खतरा थे। पाकिस्तान ने भी पलटवार किया, लेकिन यहीं से उनका नया सिरदर्द शुरू हो गया।

कश्मीर पर इसका क्या असर होगा?
अब असली पेंच यहाँ आता है। सालों से पाकिस्तान का सारा जोर, सारी सेना और सारा बजट केवल एक ही दिशा में रहा है—भारत की सीमा (LOC)। पाकिस्तान अपनी कश्मीर पॉलिसी के जरिए हमेशा से अशांति फैलाने की कोशिश करता रहा है। लेकिन अब उसकी हालत 'आगे कुआँ और पीछे खाई' वाली हो गई है।

अगर ईरान के साथ सीमा पर हालात बिगड़ते हैं, तो पाकिस्तान को अपनी फौज का एक बड़ा हिस्सा अपनी पश्चिमी सीमा पर तैनात करना पड़ेगा। जानकारों का कहना है कि जब कोई देश अपने दो-दो पड़ोसियों के साथ मोर्चा खोल लेता है, तो उसकी ताकत बंट जाती है।

भारत के लिए मौका या सिर्फ शांति?
भारत हमेशा से ये चाहता रहा है कि उसकी सीमा पर घुसपैठ रुके और कश्मीर के युवाओं के हाथ में बंदूक की जगह काम हो। अगर पाकिस्तान ईरान के साथ अपने मसले सुलझाने में फंसा रहता है, तो उसके लिए कश्मीर में घुसपैठियों को बढ़ावा देना या वहां हिंसा फैलाना काफी मुश्किल हो जाएगा। उसे अपनी बची-कुची आर्थिक और सैन्य शक्ति अपने खुद के वजूद को बचाने में लगानी होगी।

शिआ-सुन्नी संघर्ष का पहलू
इस पूरे विवाद में एक धार्मिक एंगल भी है। ईरान शिया बाहुल्य देश है और पाकिस्तान में भी शिया समुदाय की अच्छी खासी आबादी है। अगर पाकिस्तान ईरान से सीधा टकराता है, तो उसके अपने ही घर में यानी देश के अंदर भी असंतोष पैदा हो सकता है। ऐसे में कश्मीर के लोग भी देख पा रहे हैं कि पाकिस्तान जो खुद को मुसलमानों का हमदर्द बताता है, वो कैसे मुस्लिम देशों के साथ ही लड़ाई में उलझा हुआ है।

अंत में बस इतना...
देखा जाए तो भारत की नीति बहुत साफ है हम किसी की लड़ाई में अपनी खुशी नहीं ढूंढते, लेकिन अपनी सुरक्षा के साथ समझौता भी नहीं करते। पाकिस्तान अगर अपने पश्चिमी सीमा पर ईरान से उलझता है, तो यह तय है कि कश्मीर के सरहद पार से होने वाली शरारतें कम होंगी। इसका सीधा फायदा वहां रहने वाले लोगों को मिलेगा, जिन्हें लंबे समय के बाद शांति और सुकून की जिंदगी नसीब हो सकती है।