Iran-Pakistan Tension : दो किनारों पर फंसा पाकिस्तान, क्या ईरान से झगड़ा खत्म कर देगा कश्मीर में होने वाली घुसपैठ?

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News India Live, Digital Desk: Iran-Pakistan Tension : आजकल अखबारों और सोशल मीडिया पर एक खबर सबसे ज्यादा तैर रही है ईरान और पाकिस्तान का बढ़ता तनाव। एक ज़माना था जब इन दोनों को करीब माना जाता था, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि दोनों एक-दूसरे पर मिसाइलें दाग रहे हैं। हम भारतीय होने के नाते इसे सिर्फ 'दुनिया में क्या हो रहा है' की तरह देख सकते हैं, लेकिन सच तो ये है कि इस तनाव का सीधा ताल्लुक हमारे कश्मीर और सरहद की सुरक्षा से है।

पाकिस्तान की नई मुसीबत
पाकिस्तान हमेशा से अपनी पूरी ताकत और ध्यान भारत की ओर लगाकर रखता था। सीमा पर चौकसी हो या घुसपैठ की कोशिशें, उनका सारा बजट और फौजी दिमाग कश्मीर की तरफ ही रहता था। लेकिन अब वक्त बदल गया है। अफगानिस्तान की तरफ से पहले ही तालमेल बिगड़ा हुआ था, और अब ईरान के साथ खुली दुश्मनी ने पाकिस्तान के लिए 'आगे कुआँ पीछे खाई' वाली स्थिति पैदा कर दी है।

सीधी सी बात ये है कि अगर पाकिस्तान को अपनी ईरान वाली सरहद (वेस्टर्न बॉर्डर) बचानी है, तो उसे अपनी फौज और हथियारों का एक बड़ा हिस्सा वहां भेजना पड़ेगा। इसका मतलब है कि भारत से लगी एलओसी (LOC) पर उसकी पकड़ ढीली होना तय है।

शिया-सुन्नी फैक्टर और देश के अंदर का हाल
पाकिस्तान की एक बड़ी समस्या उनके घर के अंदर की भी है। ईरान एक शिया बहुल देश है, जबकि पाकिस्तान में भी शिया समुदाय की अच्छी-खासी आबादी रहती है। अगर ईरान के साथ रिश्ते और बिगड़ते हैं, तो पाकिस्तान के भीतर सांप्रदायिक तनाव बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा। जब कोई देश अंदरूनी कलह से जूझ रहा हो, तो उसके लिए सीमा पार आतंकवाद को पालना-पोसना नामुमकिन सा हो जाता है।

कश्मीर को कैसे मिलेगा सुकून?
कश्मीर के लोग सालों से सीमा पार की अशांति के शिकार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब पाकिस्तान का ध्यान बंट चुका है। उसकी आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है, ऊपर से अब दो मोर्चों पर जंग का खतरा है। ऐसे में वो कश्मीर में घुसपैठ करवाने या माहौल बिगाड़ने के लिए पैसे और वक्त नहीं निकाल पाएगा।

भारत के लिए यह एक रणनीतिक जीत की तरह है। जब दुश्मन अपनी ही गलतियों और दूसरे मोर्चों पर उलझ जाता है, तो हमें अपनी सुरक्षा और मजबूत करने का पूरा वक्त मिलता है। पिछले कुछ समय में हमने देखा है कि कश्मीर में पथराव और अलगाववाद की घटनाएं कम हुई हैं, पाकिस्तान की इस नई उलझन से वहां शांति और विकास की रफ्तार और तेज हो सकती है।

चलते-चलते एक बात...
कुल मिलाकर देखा जाए तो यह झगड़ा पाकिस्तान को अलग-थलग कर रहा है। उसे समझ आ गया है कि अब वह भारत को आंखें नहीं दिखा सकता क्योंकि उसका अपना घर सुरक्षित नहीं है। हमारे लिए यह शांत होकर अपनी तरक्की पर ध्यान देने का सही मौका है। अगर सरहद के पार से आने वाली बंदूकें शांत रहती हैं, तो यकीन मानिए, घाटी की अगली सुबह बहुत खूबसूरत होने वाली है।