अमेरिका की मार या घर का कलेश? जानिए वह क्या वजह है कि आग उगलने वाला ईरान अब शांति की भाषा बोल रहा है
News India Live, Digital Desk: ईरान एक ऐसा देश रहा है जिसकी पहचान उसकी सख्ती और कभी न झुकने वाले रवैये से रही है। चाहे अमेरिका से लोहा लेना हो या मध्य पूर्व (Middle East) में अपनी धाक जमानी हो, ईरान ने हमेशा कड़ा रुख अपनाया है। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से हवाओं का रुख बदला-बदला सा लग रहा है। खबरें आ रही हैं कि जो ईरान कल तक किसी की सुनने को तैयार नहीं था, वह अब बातचीत के लिए मेज़ पर आने को राज़ी है।
वो 544 जानें जो कभी वापस नहीं आएंगी
ईरान की इस नरमी के पीछे सबसे बड़ा कारण देश के अंदरूनी हालात बताए जा रहे हैं। हिजाब कानून और नागरिक अधिकारों को लेकर देश भर में जो गुस्सा भड़का, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। रिपोर्ट्स बताती हैं कि सरकार द्वारा इन प्रदर्शनों को कुचलने की कोशिश में लगभग 544 लोगों की जान जा चुकी है।
किसी भी सरकार के लिए यह कोई गर्व की बात नहीं होती कि उसे अपनी ही जनता को खामोश करने के लिए इस हद तक जाना पड़े। अपनों की इन मौतों और लगातार होते विरोध प्रदर्शनों ने सरकार की नींव हिला दी है। सड़कों पर उतरते नौजवान और हर घर से उठती आवाज़ों ने यह संदेश दे दिया है कि लोग अब सिर्फ आदेशों के सहारे नहीं रहना चाहते।
अमेरिका की 'प्रेशर पॉलिटिक्स' का असर?
सिर्फ देश के अंदर का दबाव ही काफी नहीं था, अमेरिका ने अपनी पाबंदियों (Sanctions) और कूटनीति के ज़रिए ईरान की आर्थिक कमर तोड़ दी है। महंगाई आसमान छू रही है, करेंसी गिरती जा रही है और आम जनता के लिए रोज़ी-रोटी का इंतज़ाम करना भी मुश्किल होता जा रहा है।
कहते हैं न कि "भूख बड़े-बड़े वादों और सिद्धांतों को कमज़ोर कर देती है।" ईरान भी शायद इसी दौर से गुज़र रहा है। उसे समझ आ गया है कि दुनिया से कटकर और अपने लोगों को नाराज रखकर वह लंबे समय तक सर्वाइव नहीं कर पाएगा।
बातचीत का हाथ: डर या डिप्लोमेसी?
अब सवाल उठता है कि ईरान जो बातचीत की बात कर रहा है, क्या वह सच में बदलाव चाहता है?
जानकारों का मानना है कि यह ईरान की एक रणनीतिक पहल भी हो सकती है ताकि उसे दुनिया से थोड़ी राहत मिले, कुछ पाबंदियां हटें और वह अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा कर सके। लेकिन इस बार उसके लिए यह राह आसान नहीं होगी, क्योंकि उसे न सिर्फ अमेरिका को, बल्कि अपने ही देश के लोगों को भी जवाब देना होगा।
एक निष्कर्ष जो हमें सोचने पर मजबूर करता है
किसी भी देश की ताक़त उसकी मिसाइलों में नहीं, बल्कि उसके खुशहाल नागरिकों में होती है। ईरान की मौजूदा स्थिति यह सबक देती है कि जब आप बाहर जंग लड़ रहे होते हैं, तो आपको यह भी देखना चाहिए कि आपके अपने घर की दीवारें कितनी मज़बूत हैं। बातचीत की ओर ईरान का बढ़ना भले ही मजबूरी में उठाया गया कदम लगे, लेकिन शांति का रास्ता हमेशा हिंसा से बेहतर होता है।
आने वाला समय बताएगा कि क्या यह ईरान के लिए एक नई शुरुआत होगी या महज़ एक अस्थायी राहत।