UN में पाकिस्तान ने की पानी पर शिकायत, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर और आतंकवाद की याद दिलाकर की बोलती बंद

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News India Live, Digital Desk: संयुक्त राष्ट्र के एक बड़े मंच पर पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर और पानी का मुद्दा उठाकर भारत को घेरने की कोशिश की, लेकिन उसे ऐसा करारा और मुंहतोड़ जवाब मिला, जिसकी शायद उसने उम्मीद भी नहीं की होगी। भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान के आरोपों को हवा में उड़ा दिया, बल्कि उसे आतंकवाद और उसके अपने ही देश में हो रहे मानवाधिकारों के हनन पर ऐसा आईना दिखाया कि सबकी बोलती बंद हो गई।

क्या हुआ था UN की बैठक में?

यह पूरा मामला संयुक्त राष्ट्र की एक हाई-लेवल मीटिंग का है, जहां पानी के स्रोतों के मैनेजमेंट पर चर्चा हो रही थी। इस गंभीर मंच का भी पाकिस्तान ने गलत इस्तेमाल किया और सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) का जिक्र करते हुए भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाने शुरू कर दिए।

लेकिन भारत अब ऐसे मामलों में चुप बैठने वालों में से नहीं है। भारत की तरफ से युवा डिप्लोमैट पेटल गहलोत ने जवाब देने का मोर्चा संभाला।

भारत का करारा जवाब: पानी से बात शुरू, आतंकवाद पर खत्म

पेटल गहलोत ने अपनी बात की शुरुआत में ही साफ कर दिया कि पाकिस्तान के आरोप पूरी तरह से "झूठे, बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित" हैं। उन्होंने कहा कि भारत सिंधु जल संधि का हमेशा से सम्मान करता आया है और एक जिम्मेदार देश की तरह अपनी भूमिका निभा रहा है।

लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। भारत ने इसके बाद पाकिस्तान पर ऐसा पलटवार किया जो सीधे उसकी दुखती रग पर लगा। भारत ने कहा:

"जो देश खुद आतंकवाद का केंद्र है और सीमा पार से आतंकवाद को सरकारी नीति की तरह इस्तेमाल करता है, उसे किसी दूसरे देश पर उंगली उठाने का कोई हक नहीं है।"

जब 'ऑपरेशन सिंदूर' का हुआ जिक्र

भारत का सबसे तीखा हमला तब हुआ जब 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र किया गया। पेटल गहलोत ने UN को बताया कि पाकिस्तान को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए, जहां 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे घिनौने अभियान चलाए जाते हैं। आपको बता दें, 'ऑपरेशन सिंदूर' उन घटनाओं को कहा जाता है जहां पाकिस्तान में हिंदू और सिख समुदाय की नाबालिग लड़कियों को जबरन अगवा कर, उनका धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम पुरुषों से शादी करा दी जाती है।

भारत ने साफ शब्दों में पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग करने और भारत के खिलाफ झूठा प्रचार करने के बजाय, अपने देश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को रोके और आतंकवाद पर लगाम लगाए। इस जवाब के बाद पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा।