पचपदरा रिफाइनरी उद्घाटन पीएम मोदी की रैली और शादियों का सावा, भाजपा के सामने 2 लाख की भीड़ जुटाने की चुनौती
News India Live, Digital Desk : राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में 21 अप्रैल 2026 को होने जा रहा रिफाइनरी का उद्घाटन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा इस वक्त प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है। भाजपा ने इस आयोजन को एक 'मेगा शो' बनाने के लिए 2 लाख लोगों की भीड़ का लक्ष्य रखा है, लेकिन इस लक्ष्य के आड़े शादियों का सीजन 'ग्रहण' बनकर खड़ा हो गया है।
चुनौती: 'अबूझ सावा' और भीड़ का गणित
राजस्थान में शादियों का सीजन अपने चरम पर है, जो राजनीतिक आयोजन के लिए सबसे बड़ी बाधा साबित हो रहा है:
तारीखों का टकराव: 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया (आखा तीज) का अबूझ सावा है। इसके ठीक बाद 20 और 21 अप्रैल को भी प्रदेशभर में हजारों शादियां तय हैं।
परिवहन का संकट: शादियों के कारण बसें, जीप और ट्रैवलर गाड़ियां महीनों पहले से बुक हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं के सामने लोगों को रैली स्थल तक लाने के लिए वाहनों का इंतजाम करना 'टेढ़ी खीर' साबित हो रहा है।
सामाजिक प्राथमिकता: ग्रामीण इलाकों में लोग राजनीतिक रैली के बजाय करीबी रिश्तेदारों की शादियों में शामिल होने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
रणनीति: 15 जिलों को टारगेट, बाड़मेर पर दारोमदार
भीड़ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भाजपा संगठन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है:
मुख्य जिम्मेदारी: जोधपुर संभाग के 15 जिलों को भीड़ जुटाने का जिम्मा सौंपा गया है।
बाड़मेर का लक्ष्य: अकेले बाड़मेर जिले से 50 हजार लोगों को लाने का टारगेट है। इसमें शिव, चौहटन और बायतु विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नेताओं की फौज: प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के निर्देशन में मंत्री जोगाराम कुमावत, केके विश्नोई, सांसद लुंबाराम चौधरी और कई विधायक बूथ स्तर पर बैठकें कर रहे हैं।
रिफाइनरी उद्घाटन का महत्व
पचपदरा रिफाइनरी न केवल राजस्थान बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर है। 21 अप्रैल (बैशाख शुक्ल पंचमी) के शुभ दिन प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन करेंगे। भाजपा चाहती है कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि का संदेश आगामी चुनावों से पहले जनता तक मजबूती से पहुंचे।
क्या रिश्तों पर भारी पड़ेगी राजनीति?
फिलहाल मुकाबला 'बैंड-बाजे' और 'चुनावी बिगुल' के बीच है। भाजपा की सोशल मीडिया टीम और जमीनी कार्यकर्ता घर-घर जाकर पीले चावल (निमंत्रण) बांट रहे हैं, ताकि शादियों के बावजूद लोग प्रधानमंत्री को सुनने पहुंचें।