बल्लारी में मौत का तांडव ,कांग्रेस नेता के पोस्टर और वाल्मीकि मूर्ति विवाद ने ले ली एक मासूम की जान

Post

News India Live, Digital Desk: कई बार राजनीति और गुटबाजी इतनी अंधी हो जाती है कि इंसान को सही-गलत का होश नहीं रहता। कर्नाटक के बल्लारी से जो खबर निकलकर सामने आ रही है, वह न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज के बीच बढ़ती नफरत का भी आईना है। यहाँ एक बैनर फटने और वाल्मीकि मूर्ति (Valmiki Statue) से जुड़े विवाद ने ऐसा तूल पकड़ा कि देखते ही देखते पत्थरबाजी और मारपीट शुरू हो गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई।

शुरुआत कहाँ से हुई?
मामला काफी मामूली था एक पोस्टर का फटना। जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस के एक नेता या सरकार के प्रचार वाला बैनर किसी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बस, यही वह चिंगारी थी जिसने बारूद का काम किया। आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हुआ और जल्द ही इसमें 'धार्मिक पहचान' और 'समुदाय के गौरव' के नारे शामिल हो गए। वाल्मीकि प्रतिमा के पास शुरू हुए इस विवाद ने देखते ही देखते दो गुटों को सड़कों पर खड़ा कर दिया।

विधायकों की भिड़ंत और राजनीतिक रंग
दुख की बात यह है कि जहाँ नेताओं को शांति की अपील करनी चाहिए थी, वहां इस मामले में विधायकों के बीच का आपसी मनमुटाव भी हवा देने लगा। राजनीति में जब सत्ता और रसूख की लड़ाई शामिल हो जाती है, तो धरातल पर लड़ने वाला कार्यकर्ता और आम नागरिक ही सबसे पहले निशाना बनता है। बल्लारी के इस केस में भी वही हुआ। भीड़ बेकाबू हुई, पत्थर चले और अफरा-तफरी में एक व्यक्ति ने अपनी जान गंवा दी।

दहशत में बल्लारी की जनता
फिलहाल पूरे इलाके में पुलिस तैनात है और माहौल को शांत करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन सवाल वही है कि आखिर ये कैसा लोकतंत्र है जहाँ बैनर की सुरक्षा के लिए लोग एक-दूसरे का खून बहाने को उतारू हो जाते हैं? जिस घर ने अपना सदस्य खोया है, उसके लिए न तो पोस्टर कोई मायने रखता है और न ही वो क्रेडिट जिसकी राजनीति नेता लोग कर रहे हैं।

पुलिस अब वीडियो फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों की पहचान हो सके। सरकार का दावा है कि सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन स्थानीय लोग डरे हुए हैं कि कहीं ये आग फिर से न भड़क उठे। इस तरह की हिंसा हमें ये याद दिलाती है कि समाज में संवाद की कितनी कमी हो गई है और नफरत कितनी हावी है।