बिहार की धरती से विपक्ष का मेगा शो, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने 'वोटर अधिकार यात्रा' से फूंका चुनावी बिगुल
बिहार की सियासी जमीन एक बार फिर एक बड़े राजनीतिक आंदोलन की गवाह बन रही है। लोकसभा चुनावों के बाद शांति के बाद, अब राज्य में विपक्षी गठबंधन ने अपनी पूरी ताकत के साथ सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और बिहार में विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, ने आज एक साथ 'वोटर अधिकार यात्रा' (Voter Adhikar Yatra) का आगाज कर दिया है। यह यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक मार्च नहीं, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनावों के लिए विपक्ष के चुनावी अभियान का 'शंखनाद' माना जा रहा है।
पटना की सड़कों पर उमड़ी भारी भीड़ के बीच, राहुल और तेजस्वी के एक ही रथ पर सवार होने की तस्वीरों ने बिहार से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस यात्रा के नाम से ही साफ है कि विपक्ष इस बार सीधे तौर पर लोकतंत्र, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता के अधिकारों को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने जा रहा है।
क्या है इस 'वोटर अधिकार यात्रा' का असली मकसद?
जैसा कि नाम से ही जाहिर है, इस यात्रा का केंद्रीय विषय 'मतदाता के अधिकार' हैं। हाल के दिनों में राहुल गांधी लगातार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं। यह यात्रा उसी मुहिम का एक जमीनी विस्तार है।
इस यात्रा के मुख्य उद्देश्य हैं:
- लोकतंत्र बचाने का संदेश: विपक्ष जनता के बीच यह संदेश लेकर जा रहा देश में लोकतंत्र खतरे में और मतदाता के वोट का अधिकार सुरक्षित नहीं है। वे EVM की पारदर्शिता और VVPAT पर्चियों के 100% मिलान की अपनी मांग को जनता के बीच ले जाएंगे।
- सरकार की नाकामियों को उजागर करना: वोटर अधिकार के व्यापक मुद्दे के साथ-साथ, इस यात्रा के दौरान तेजस्वी यादव और राहुल गांधी बिहार की नीतीश कुमार-बीजेपी सरकार की कथित नाकामियों को भी उजागर करेंगे। इसमें बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख होंगे।
- विपक्षी एकता का प्रदर्शन: राहुल गांधी और तेजस्वी यादव का एक साथ मंच पर आना, विपक्षी गठबंधन की एकजुटता का एक बड़ा प्रदर्शन है। यह यात्रा कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने की एक कोशिश है कि विपक्ष एकजुट होकर NDA का मुकाबला करने के लिए तैयार है।
क्यों अहम है राहुल-तेजस्वी की यह जुगलबंदी?
इस यात्रा की सबसे बड़ी ताकत राहुल गांधी और तेजस्वी यादव का एक साथ आना है।
- राहुल गांधी, जो राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का एक प्रमुख चेहरा हैं, इस यात्रा को एक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य देते हैं।
- तेजस्वी यादव, जो बिहार के सबसे लोकप्रिय युवा नेताओं में से एक हैं और जिनकी जमीन पर मजबूत पकड़ है, इस यात्रा को स्थानीय मुद्दों और जनता से सीधे जोड़ते हैं।
यह जुगलबंदी विपक्ष के लिए एक शक्तिशाली समीकरण बनाती है, जिसका सीधा निशाना NDA का वोट बैंक है। दोनों नेता अपनी रैलियों में केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की नीतीश सरकार, दोनों पर एक साथ हमला बोल रहे हैं।
बिहार की राजनीति पर क्या होगा इस यात्रा का असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना'वोटर अधिकार यात्रा' बिहार की राजनीति पर कई गहरे प्रभाव डाल सकती है:
- चुनावी माहौल तैयार करना: यह यात्रा राज्य में समय से पहले ही एक चुनावी माहौल तैयार कर देगी और राजनीतिक बहस का एजेंडा तय करने में विपक्ष को मदद करेगी।
- युवाओं को साधने की कोशिश: तेजस्वी और राहुल, दोनों ही युवा मतदाताओं के बीच लोकप्रिय हैं। बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाकर वे सीधे तौर पर राज्य के युवाओं को अपने पाले में लाने की कोशिश करेंगे।
- NDA पर दबाव: यह यात्रा निश्चित रूप से सत्ताधारी NDA गठबंधन पर एक राजनीतिक दबाव बनाएगी और उन्हें विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए मजबूर करेगी।
यह यात्रा कई चरणों में बिहार के अलग-अलग जिलों से होकर गुजरेगी। अब देखना यह है कि राहुल-तेजस्वी की यह जोड़ी जनता का कितना समर्थन हासिल कर पाती और क्या यह 'वोटर अधिकार यात्रा' बिहार में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की नींव रख पाएगी।