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March 20 2026 04:18 am

Old Pension Scheme : 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए बड़ी खबर आखिर क्यों कर्मचारी NPS के बजाय OPS को दे रहे हैं प्राथमिकता

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News India Live, Digital Desk : 10 मार्च 2026 को राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा दिए गए बयान के अनुसार, केंद्र सरकार के पास वर्तमान में लगभग 50.14 लाख कर्मचारी हैं। लेकिन जब बात पेंशन की आती है, तो एक बहुत बड़ा अंतर दिखाई देता है। आंकड़ों के अनुसार, हर 139 OPS पेंशनभोगियों पर NPS का केवल 1 पेंशनभोगी है।

1. आंकड़ों का गणित (The Big Gap)

योजनापेंशनभोगियों की संख्या (लगभग)मुख्य विशेषता
पुरानी पेंशन (OPS)69 लाखअंतिम वेतन का 50% निश्चित पेंशन + DA।
NPS49,802 (31 जनवरी 2026 तक)बाजार आधारित रिटर्न, कोई निश्चित गारंटी नहीं।

2. कर्मचारी OPS को प्राथमिकता क्यों दे रहे हैं? (Key Reasons)

कर्मचारी यूनियनों और विशेषज्ञों के अनुसार, OPS की लोकप्रियता के पीछे 3 प्रमुख कारण हैं:

निश्चित आय: OPS में रिटायरमेंट के बाद अंतिम मूल वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलना तय है, जबकि NPS पूरी तरह शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर है।

महंगाई राहत (Dearness Relief): OPS में साल में दो बार महंगाई भत्ता (DA) बढ़ता है, जिससे पेंशन की राशि भी बढ़ती है। NPS में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

शून्य योगदान: OPS के लिए कर्मचारी के वेतन से कोई कटौती नहीं होती (पूरी तरह सरकार द्वारा वित्तपोषित), जबकि NPS में कर्मचारी को अपनी बेसिक सैलरी का 10% योगदान देना पड़ता है।

3. सरकार का 'बीच का रास्ता': यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)

OPS की बढ़ती मांग और NPS के विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का विकल्प पेश किया है:

गारंटीड पेंशन: 25 साल की सेवा के बाद अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा।

न्यूनतम पेंशन: 10 साल की सेवा के बाद कम से कम ₹10,000 प्रति माह की गारंटी।

विकल्प: कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार NPS या UPS में से किसी एक को चुन सकते हैं।

4. राज्यों और कैग (CAG) की चेतावनी

जहाँ राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों ने चुनावी वादों के तहत OPS बहाल की है, वहीं कैग (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि पुरानी पेंशन पर लौटना राज्यों की वित्तीय स्थिति के लिए 'विनाशकारी' (Fiscal Disaster) साबित हो सकता है क्योंकि यह आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज का भारी बोझ डालेगा।