BREAKING:
April 09 2026 01:41 am

जैसलमेर के बाघेवाला में ऑयल इंडिया का बड़ा कीर्तिमान,रिकॉर्ड तोड़ तेल उत्पादन से ऊर्जा सुरक्षा को मिली नई ताकत

Post

News India Live, Digital Desk: वैश्विक तेल बाजार में जारी अस्थिरता और मिडिल ईस्ट (खासकर ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की संभावित घेराबंदी) के संकट के बीच राजस्थान के थार रेगिस्तान से भारत के लिए एक बेहद राहत भरी और गर्व करने वाली खबर आई है। सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने जैसलमेर स्थित अपने बाघेवाला फील्ड (Baghewala Field) में कच्चे तेल के उत्पादन का अब तक का सबसे बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी ने यहां 1,202 बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड उत्पादन स्तर को छू लिया है, जो पिछले साल के 705 बैरल प्रतिदिन के मुकाबले लगभग 70 प्रतिशत अधिक है।

वित्तीय वर्ष 2025-26: आंकड़ों की जुबानी सफलता

राजस्थान के इस फील्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाले आंकड़े पेश किए हैं:

सालाना उत्पादन: इस वर्ष कुल 43,773 मीट्रिक टन कच्चे तेल का उत्पादन हुआ।

पिछला रिकॉर्ड: पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में यह आंकड़ा 32,787 मीट्रिक टन था।

कुल कुएं: 200.26 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में कुल 52 कुएं खोदे गए हैं, जिनमें से वर्तमान में 33 कुएं पूरी तरह सक्रिय रूप से उत्पादन कर रहे हैं।

CSS तकनीक: जिसने बदल दी थार की तस्वीर

बाघेवाला फील्ड की सबसे बड़ी चुनौती यहां मिलने वाला 'हैवी क्रूड' (भारी तेल) है। यह तेल इतना गाढ़ा (High Viscosity) होता है कि इसे पारंपरिक तरीकों से निकालना लगभग असंभव था। ऑयल इंडिया ने इस चुनौती को आधुनिक तकनीक से मात दी:

साइक्लिक स्टीम स्टिम्युलेशन (CSS): इस थर्मल रिकवरी तकनीक में जमीन के अंदर गर्म भाप भेजी जाती है, जिससे गाढ़ा तेल पतला हो जाता है और उसे पंप करना आसान होता है। इस साल 19 कुओं में सफलतापूर्वक CSS का उपयोग किया गया।

फिशबोन ड्रिलिंग (Fishbone Drilling): भारत में पहली बार इस क्षेत्र में 'फिशबोन ड्रिलिंग' और 'बेयरफुट कंप्लीशन' जैसी जटिल तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे तेल की रिकवरी दर में भारी बढ़ोतरी हुई है।

जैसलमेर से गुजरात की रिफाइनरी तक का सफर

थार के रेगिस्तान से निकलने वाले इस तेल को देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजारा जाता है।

सबसे पहले कच्चे तेल को बड़े टैंकरों के जरिए गुजरात के मेहसाणा स्थित ओएनजीसी (ONGC) की फैसिलिटी तक पहुंचाया जाता है।

वहां से इसे पाइपलाइन के माध्यम से इंडियन ऑयल (IOCL) की कोयाली रिफाइनरी भेजा जाता है, जहां इसे पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जाता है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी ऑयल इंडिया की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और ऊर्जा सुरक्षा के विजन की एक बड़ी जीत बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाघेवाला जैसे फील्ड्स से बढ़ता उत्पादन न केवल कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करेगा, बल्कि वैश्विक संकट के समय देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।