अब घर से चादर-तकिया ले जाने का झंझट खत्म! रेलवे ने स्लीपर क्लास के लिए शुरू की यह शानदार सुविधा
अगर आप भी अक्सर ट्रेन के स्लीपर कोच (Sleeper Class) में सफर करते हैं, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ले आएगी. भारतीय रेलवे ने यात्रियों को एक बड़ा तोहफा देते हुए नॉन-एसी स्लीपर कोच में भी बेडरोल, यानी चादर, तकिया और तकिया कवर देने की सुविधा शुरू करने का ऐलान किया है. अब तक यह सुविधा सिर्फ AC कोच के यात्रियों को ही मिलती थी, लेकिन अब स्लीपर क्लास में सफर करने वाले लाखों लोगों, खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी.
अब सर्दियों और मानसून के मौसम में भारी-भरकम बिस्तर साथ लेकर चलने की कोई जरूरत नहीं होगी.
कितना होगा खर्च? (बहुत ही मामूली)
रेलवे ने इस सुविधा के लिए दरें बहुत ही वाजिब रखी हैं:
- पूरा सेट (1 बेडशीट + तकिया + तकिया कवर): मात्र ₹50
- सिर्फ बेडशीट: मात्र ₹20
- सिर्फ तकिया और तकिया कवर: मात्र ₹30
कब और किन ट्रेनों में शुरू होगी यह सेवा?
यह सुविधा नए साल में 1 जनवरी 2026 से शुरू की जाएगी. पहले चरण में, दक्षिण रेलवे (Southern Railway) की 10 प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों में इसे लागू किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
- चेन्नई-मेट्टुपालयम नीलगिरि सुपरफास्ट एक्सप्रेस
- चेन्नई-मंगलुरु सुपरफास्ट एक्सप्रेस
- चेन्नई एग्मोर-मन्नारगुडी एक्सप्रेस
- चेन्नई एग्मोर-तिरुचेंदूर सुपरफास्ट एक्सप्रेस
- चेन्नई-पलक्कड़ एक्सप्रेस
- चेन्नई एग्मोर-सेंगोट्टई सिलाम्बु सुपरफास्ट एक्सप्रेस
- तांबरम-नागरकोइल सुपरफास्ट एक्सप्रेस
- चेन्नई-तिरुवनंतपुरम सुपरफास्ट एक्सप्रेस
- चेन्नई-एलेप्पी सुपरफास्ट एक्सप्रेस
- चेन्नई एग्मोर-मंगलुरु एक्सप्रेस
पहले चलाकर देखा, लोगों को बहुत पसंद आया
आपको बता दें कि यह योजना अचानक नहीं लाई गई है. रेलवे ने पहले एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे चलाकर देखा था, जिसे यात्रियों से बहुत ही शानदार प्रतिक्रिया मिली. इसी सफलता के बाद अब इसे स्थायी रूप से लागू करने का फैसला किया गया है.
स्वच्छता की चिंता करने की भी कोई जरूरत नहीं है. रेलवे ने बेडरोल की खरीद, मशीनों से धुलाई, पैकिंग और बांटने का पूरा काम एक कॉन्ट्रैक्टर को दिया है, ताकि आपको हमेशा साफ-सुथरे और अच्छी क्वालिटी के बिस्तर मिलें.
इस कदम से जहां यात्रियों को आराम मिलेगा, वहीं रेलवे को भी थोड़ा अतिरिक्त राजस्व मिलेगा. लोग सोशल मीडिया पर भी रेलवे के इस फैसले की जमकर तारीफ कर रहे हैं और इसे "एक छोटा कदम, लेकिन एक बड़ी राहत" बता रहे हैं.